New Raipur Blue Water Aadil Khan : रायपुर (छत्तीसगढ़): राजधानी रायपुर के राजधानी रायपुर के माना थाना क्षेत्र के नकटी गांव स्थित ‘ब्लू वाटर’ (गिट्टी खदान) में डूबे मौदहापारा निवासी आदिल खान (24 वर्ष) का शव आखिरकार बाहर निकाल लिया गया है। बीते बुधवार (19 अगस्त 2026) की शाम को आदिल इस खदान में डूबा था। पिछले तीन दिनों से लगातार स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) की टीमें करीब 400 फीट गहरी इस खदान में सर्च ऑपरेशन चला रही थीं। शनिवार देर रात करीब 77 घंटे बीत जाने के बाद आदिल का शव खुद पानी की सतह पर आ गया, जिसे रेस्क्यू टीम ने तुरंत कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेकाहारा अस्पताल रवाना किया।
दोस्तों के बीच लगी थी पार करने की शर्त
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आदिल बुधवार शाम को अपने तीन दोस्तों के साथ ब्लू वाटर घूमने पहुंचा था। इसी दौरान दोस्तों के बीच खदान के पानी को एक छोर से दूसरे छोर तक तैरकर पार करने की शर्त लग गई। शर्त के मुताबिक आदिल और उसका एक अन्य दोस्त पानी में उतर गए। तैरते समय आदिल खदान के अत्यधिक गहरे हिस्से (करीब 400 फीट) की तरफ चला गया और अचानक सांस फूलने व थकान के कारण डूबने लगा। इस पूरी घटना का एक खौफनाक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आदिल को डूबते हुए देखा जा सकता है।

रेस्क्यू में क्यों लगे 77 घंटे? प्रशासन ने बुलाई थी इंडियन नेवी
यह सर्च ऑपरेशन रायपुर के इतिहास के सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक रहा:
- अत्यधिक गहराई और अंधेरा: यह कोई सामान्य तालाब नहीं बल्कि गिट्टी की खदान है, जिसकी गहराई 400 फीट से अधिक है। पानी के नीचे पूरी तरह अंधेरा होने के कारण अंडरवॉटर कैमरों को भी दिक्कत आ रही थी।
- कम तापमान और चट्टानें: खदान के पानी के अंदर का तापमान बेहद कम (अत्यधिक ठंडा) था और नीचे नुकीली चट्टानें थीं, जिससे गोताखोरों को गहरे पानी में जाने में परेशानी हो रही थी।
- नौसेना की ली जा रही थी मदद: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इंडियन नेवी (Indian Navy) के ईस्टर्न कमांड की विशेष टीम को भी मदद के लिए बुलाया था, जो रविवार को रायपुर पहुंचने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही शव बरामद हो गया।
मौत का कुआं बना ‘ब्लू वाटर’, 9 साल में 10वीं मौत
बारिश के दिनों में इस बंद पड़ी गिट्टी खदान में पानी भर जाता है, जो दिखने में बेहद साफ और एकदम नीला नजर आता है। इसी नीले पानी के आकर्षण में युवा अक्सर यहां पिकनिक मनाने, रील बनाने और नहाने पहुंच जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 से लेकर अब तक इस खदान में डूबने से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले साल 31 अक्टूबर 2025 को भी स्कूल बंक करके यहां पहुंचे छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल के दो छात्रों की डूबने से मौत हो गई थी।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल, इलाका होगा पूरी तरह प्रतिबंधित
लगातार हो रहे हादसों के बाद अब प्रशासन की लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, हादसों को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले भी चेतावनी बोर्ड लगाए थे, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार असामाजिक तत्व उन बोर्ड्स को चोरी कर ले जाते हैं। इस ताजा हादसे के बाद प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने स्पष्ट किया है कि अब इस पूरे ‘ब्लू वाटर’ क्षेत्र को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाएगा और चारों तरफ मजबूत फेंसिंग (घेराबंदी) कराई जाएगी ताकि कोई भी अंदर न प्रवेश कर सके।
