सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने, मनोकामनाओं की पूर्ति, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाता है। यह व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ करने का विशेष महत्व माना जाता है।
व्रत की शुरुआत
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या शिवालय में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और नंदी की पूजा करें।
पूजा विधि
शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से अभिषेक करें। धतूरा, भांग, सफेद फूल, चंदन, अक्षत और फल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें तथा शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करें।
व्रत में क्या खाएं
फल, दूध, दही, मखाना, सूखे मेवे, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू के आटे से बने व्यंजन, नारियल पानी और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन कर सकते हैं। कई श्रद्धालु केवल फलाहार या जल ग्रहण कर भी व्रत रखते हैं।
क्या न करें
तामसिक भोजन, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और तंबाकू का सेवन न करें। क्रोध, झूठ, विवाद और नकारात्मक व्यवहार से बचें। पूजा में टूटे हुए बेलपत्र या तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर अर्पित न करें।
व्रत का पारण
शाम को भगवान शिव की आरती और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें। यदि निर्जला व्रत रखा हो तो पूजा के बाद जल और सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
महत्व
मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, जीवन में सुख-शांति, वैवाहिक सौभाग्य, मनचाहा जीवनसाथी, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
