रायगढ़। यदि हुनर को सही मंच और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के ग्राम बासनपाली की मालती कुंभकार ने इसे साबित कर दिखाया है। मिट्टी की पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्होंने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायी मिसाल भी पेश की है।
मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के निर्देश पर आयोजित सुशासन तिहार के दौरान मालती कुंभकार ने अपनी संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की। पहले वे पारंपरिक लकड़ी के चाक से दीये और हांडी बनाती थीं। सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन और आमदनी दोनों सीमित थे।
बाद में उन्होंने अपने एकता महिला स्व-सहायता समूह को बिहान योजना से जोड़ा। माटी कला बोर्ड और हस्तशिल्प बोर्ड के सहयोग से उन्हें इलेक्ट्रॉनिक चाक और आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिससे उनके काम की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में बड़ा बदलाव आया।
अब मालती पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुरूप आधुनिक उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। इनमें मिट्टी के कुकर, कढ़ाई, पानी की बोतल, कप-प्लेट, सजावटी पॉट और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं। व्यवसाय विस्तार के लिए उन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत 30 हजार, 80 हजार और 1 लाख रुपये का ऋण लेकर उसे अपने काम में निवेश किया।

आज मालती प्रदेश के प्रमुख सरस मेला और हस्तशिल्प मेलों में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करती हैं। रायपुर से लेकर जगदलपुर तक प्रदेश के कई जिलों में उनके उत्पादों की मांग बढ़ी है।
मालती कुंभकार अब व्यक्तिगत स्तर पर और अपने समूह के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं ने केवल उनकी आय नहीं बढ़ाई, बल्कि उन्हें बड़े मंचों पर अपनी कला प्रदर्शित करने का आत्मविश्वास भी दिया।
