अबूझमाड़ के सुदूर वनांचल में अब विकास की नई आहट सुनाई देने लगी है। ताहकाडोंड गांव में पहली बार मोबाइल टावर स्थापित होने से वर्षों से चला आ रहा संचार का सन्नाटा टूट गया है। अब ग्रामीणों को अपनों से बात करने के लिए पहाड़ियों पर चढ़ने या कई किलोमीटर पैदल चलने की मजबूरी नहीं रहेगी।
नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित गांव ताहकाडोंड में मोबाइल नेटवर्क शुरू होने के साथ ही क्षेत्र डिजिटल दुनिया से जुड़ गया है। कभी ‘नो नेटवर्क ज़ोन’ कहलाने वाला यह इलाका अब सीधे संचार क्रांति का हिस्सा बन गया है।
पहाड़ियों की चढ़ाई से मिली राहत
ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा जैसे गांवों के करीब 400 ग्रामीण लंबे समय से मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे थे। एक फोन कॉल करने के लिए लोगों को ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता था। अब मोबाइल टावर लगने से यह कठिनाई खत्म हो गई है और लोग घर बैठे संवाद कर पा रहे हैं।
आपात सेवाओं और शासन तक आसान पहुंच
मोबाइल नेटवर्क का लाभ केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। अब ग्रामीण आपात स्थिति में तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क कर सकेंगे, जिससे समय पर इलाज मिलना आसान होगा। स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में भी सुधार की उम्मीद है।
इंटरनेट सुविधा मिलने से ग्रामीण अब ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे शासन की योजनाओं की जानकारी सीधे लोगों तक पहुंचेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
बदल रही सामाजिक और आर्थिक तस्वीर
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में मोबाइल टावर की स्थापना को विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क आने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और युवाओं को नई जानकारी उपलब्ध कराने में भी यह सुविधा मददगार साबित होगी।
ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र में “नए युग की शुरुआत” बताया है। शासन की यह पहल यह संकेत देती है कि अब भौगोलिक कठिनाइयां विकास की राह में बड़ी बाधा नहीं बनेंगी।
