सुशासन तिहार के दौरान कबीरधाम के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। ग्राम पंचायत लोखान के कमराखोल गांव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ग्रामीण महिलाओं से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता के नए सपने देखने के लिए प्रेरित किया।
घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच आम के विशाल पेड़ की छांव में सजी चौपाल में मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी जिंदगी के संघर्ष और सफलता की कहानियां सुन रहे थे। महिलाओं ने बताया कि कैसे स्वयं सहायता समूहों और बिहान योजना से जुड़कर उनकी जिंदगी बदली है।
जब मुख्यमंत्री को जानकारी मिली कि क्षेत्र की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”
मुख्यमंत्री के ये शब्द वहां मौजूद महिलाओं के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बन गए।
संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की कहानी
ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्हें बिहान योजना के तहत दो लाख रुपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने शटरिंग प्लेट्स खरीदकर नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत कठिन थी, लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने अपना काम बढ़ाया।
आज उनके पास करीब 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस व्यवसाय से उन्हें सालाना लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।
कचरा तेलगाम ने बताया कि पहले वे केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत कर उन्हें लगा कि उनकी मेहनत को वास्तव में पहचान मिली है और अब आगे बढ़ने का हौसला और मजबूत हुआ है।
गांवों में बदल रही आर्थिक तस्वीर
सुशासन तिहार के दौरान हुए इस संवाद ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब गांवों की आर्थिक प्रगति की नई धुरी बन रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।
कबीरधाम के वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल अब महिलाओं के भीतर जागे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन गई है।
