रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल रत्न खो दिया है।
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने बेहद साधारण परिवार से निकलकर अपनी अद्भुत प्रतिभा के दम पर पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने परंपरागत शैली से अलग कापालिक शैली में मंचीय प्रस्तुति देकर लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा को पहचानकर बड़े मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, जापान, तुर्की और मॉरीशस सहित 17 से अधिक देशों में पंडवानी का प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ की संस्कृति का परचम लहराया।
लोककला में अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्म भूषण (2003), फुकुओका पुरस्कार (2018) और पद्म विभूषण (2019) सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।
तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और साहित्यकारों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। उनका संघर्ष, साधना और कला आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
