पश्चिम बंगाल सरकार ने 1975 की इमरजेंसी के दौरान विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण जेल गए 325 लोगों के लिए 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की घोषणा की है। यह पेंशन ‘पश्चिम बंगाल लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ के तहत दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। राज्य सरकार ने ऐसे 325 लोगों की पहचान की है, जिन्हें विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के कारण जेल जाना पड़ा था।
सरकार के अनुसार, इन लोगों को सम्मान देने के उद्देश्य से मासिक पेंशन की व्यवस्था की गई है। अधिकारी ने कहा कि मौजूदा सरकार उन लोगों के आदर्शों पर बनी है, जिन्होंने लोकतंत्र और देश के लिए संघर्ष किया।
25 जून को मनाया जाता है ‘संविधान हत्या दिवस’
केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार 1975 में लागू की गई इमरजेंसी की याद में हर वर्ष 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाती है। बीजेपी शासित कई राज्यों में भी इमरजेंसी के दौरान जेल जाने वाले लोगों को सम्मान और पेंशन दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
भारत छोड़ो आंदोलन के सेनानियों को भी किया याद
इससे पहले 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर सुवेंदु अधिकारी ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के नारे को याद करते हुए कहा कि हजारों भारतीयों ने आजाद भारत के सपने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की बहादुरी और बलिदान को देश की आजादी की नींव बताया।
