Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह पर्व गणेश उत्सव के समापन और गणपति विसर्जन के लिए भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है। इस सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं, जिनका धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व बताया गया है।
क्या होता है अनंत सूत्र?
अनंत सूत्र एक पवित्र धागा होता है, जिसे आमतौर पर कपास, सूत या रेशम से तैयार किया जाता है। इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद इसे धारण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह सूत्र भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
अनंत सूत्र को धारण करने का भाव भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा, विश्वास और उनकी कृपा की कामना से जुड़ा हुआ है। कई परिवारों में इसे पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पूजा के बाद बांधा जाता है।
14 गांठों का क्या है रहस्य?
अनंत सूत्र में लगी 14 गांठों को सनातन परंपरा में ब्रह्मांड के 14 लोकों से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार ये गांठें 14 भुवनों का प्रतीक हैं। इसी वजह से अनंत सूत्र की 14 गांठों को केवल धागे की गांठ नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
भक्तों की आस्था है कि अनंत सूत्र धारण करने से भगवान विष्णु की कृपा और सुरक्षा प्राप्त होती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपराएं हैं, इनके आध्यात्मिक अर्थ को व्यक्ति की श्रद्धा और विश्वास से जोड़ा जाता है।
अनंत सूत्र कब और कैसे धारण करें?
अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत और पूजा का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा स्थल पर कलश स्थापित करने के बाद भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। इसके बाद 14 गांठों वाले अनंत सूत्र को भगवान को अर्पित कर पूजा में शामिल किया जाता है।
पूजा और मंत्र जाप पूरा होने के बाद अनंत सूत्र धारण किया जाता है। प्रचलित परंपरा के अनुसार पुरुष इसे दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे बांधने की परंपरा में अंतर भी देखने को मिलता है।
अनंत सूत्र बांधने का क्या महत्व है?
अनंत सूत्र को जीवन में ईश्वर के प्रति आस्था और सुरक्षा की भावना का प्रतीक माना जाता है। इसे बांधते समय भक्त भगवान विष्णु से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यता में ‘अनंत’ का अर्थ जिसका कोई अंत न हो, ऐसा लिया जाता है। इसलिए अनंत सूत्र व्यक्ति को भगवान की अनंत सत्ता और कृपा की याद दिलाने वाला प्रतीक माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी पर क्यों रखा जाता है व्रत?
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ अनंत व्रत और पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है।
इस दिन पूजा के बाद अनंत सूत्र धारण करना इसी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ‘हरि अनंत, हरि कथा अनंता’ की भावना के साथ भक्त भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
