नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्राओं के लिए सुरक्षित और किफायती छात्रावासों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया है। उन्होंने इंदौर में एक छात्रा से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि छात्रावास उपलब्ध नहीं होने के कारण कई छात्राओं को महंगे पीजी में रहना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई पर आर्थिक दबाव पड़ता है।
राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया और पूछा कि सरकार के पास दीये जलाने के लिए पैसे हैं, लेकिन छात्राओं के लिए छात्रावास बनाने के लिए क्यों नहीं।
उन्होंने बताया कि इंदौर में एक छात्रा उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए गांव से शहर आई थी। छात्रावास नहीं मिलने के कारण उसे पीजी में रहना पड़ा। राहुल गांधी के मुताबिक, सुरक्षित आवास के लिए हर महीने बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है और किराये की चिंता के बीच छात्राओं को पढ़ाई जारी रखनी पड़ती है। उन्होंने दावा किया कि उचित आवास की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लड़कियां पढ़ाई छोड़ने के लिए भी मजबूर हो जाती हैं।
राहुल गांधी ने आवास भत्ते का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद आवास भत्ता उसी अनुपात में नहीं बढ़ता। उन्होंने इसमें भ्रष्टाचार की समस्या का भी उल्लेख किया और सरकार से छात्राओं की सुरक्षित एवं किफायती आवास व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा।
दीये जलाने के कार्यक्रम का किया जिक्र
राहुल गांधी का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के बाद सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, 17 सितंबर को मध्य प्रदेश में करीब 3.55 करोड़ दीये जलाए गए थे। उज्जैन में शिप्रा नदी के घाटों और महाकाल लोक में 33.27 लाख दीये जलाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘आशीर्वाद का दिया’ अभियान पर कुल खर्च की आधिकारिक सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। वहीं, प्रकाशित अनुमानों के अनुसार उज्जैन के कार्यक्रम में करीब 45 हजार लीटर तेल की आवश्यकता पड़ी थी। पूरे मध्य प्रदेश में तेल की लागत का अनुमान लगभग 5.8 करोड़ से 7.2 करोड़ रुपये के बीच बताया गया है।
