धर्म डेस्क। भारत में अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जिनकी पहचान धार्मिक मान्यताओं, ऐतिहासिक परंपराओं और विशिष्ट पूजा-पद्धतियों से जुड़ी हुई है। इनमें से कुछ मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विशेष नियम बनाए गए हैं। केरल के सबरीमाला मंदिर से लेकर महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर और कर्नाटक के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों तक, इन परंपराओं को लेकर समय-समय पर चर्चा और विवाद भी होते रहे हैं।
हालांकि, सभी मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है। कई स्थानों पर नियम केवल किसी विशेष पूजा, गर्भगृह या अनुष्ठान तक सीमित हैं। आइए जानते हैं देश के पांच प्रसिद्ध मंदिरों और उनसे जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
- सबरीमाला मंदिर, केरल
केरल की पहाड़ियों में स्थित सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है। यह देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां पूजा-अर्चना के साथ 41 दिनों के कठिन व्रत और अनुशासन का विशेष महत्व माना जाता है।
परंपरागत रूप से इस मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाता रहा है। इसके पीछे भगवान अयप्पा के नैष्ठिक ब्रह्मचारी स्वरूप से जुड़ी धार्मिक मान्यता बताई जाती है।
हालांकि, महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा लंबे समय से कानूनी और सामाजिक बहस का विषय रहा है। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इसके बाद इस फैसले को लेकर व्यापक विरोध और पुनर्विचार की मांग भी सामने आई। इसलिए सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को केवल एक सामान्य मंदिर परंपरा के रूप में देखना सही नहीं होगा; इससे जुड़े कानूनी घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण हैं।
- गुरुवायूर मंदिर, केरल
केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवायूर मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इसे दक्षिण भारत के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में गिना जाता है। यहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर में प्रवेश के दौरान पारंपरिक धार्मिक नियमों और निर्धारित पूजा-पद्धतियों का पालन किया जाता है। महिलाओं के लिए भी इन नियमों का पालन जरूरी होता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि यहां महिलाओं के प्रवेश पर सामान्य रूप से प्रतिबंध है। महिलाएं मंदिर में दर्शन कर सकती हैं।
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के मंदिर प्रवेश को लेकर कुछ धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं में अलग-अलग विचार देखने को मिलते हैं। ऐसे नियमों को समझते समय मंदिर की वास्तविक व्यवस्था और व्यापक धार्मिक मान्यताओं के बीच अंतर करना जरूरी है।
- शनि शिंगणापुर मंदिर, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर भगवान शनिदेव को समर्पित है। यह मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां शनिदेव के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं।
पहले मंदिर में महिलाओं के चबूतरे पर चढ़कर शनिदेव की प्रतिमा के निकट पूजा करने को लेकर प्रतिबंध था। इस नियम को लेकर लंबे समय तक विवाद चला। वर्ष 2016 में महिलाओं के प्रवेश और पूजा के अधिकार को लेकर आंदोलन हुआ। इसके बाद मंदिर में महिलाओं को भी चबूतरे पर जाकर पूजा करने की अनुमति दी गई।
इसलिए शनि शिंगणापुर मंदिर में आज भी महिलाओं के प्रवेश पर पूरी तरह रोक होने का दावा सही नहीं है। यहां से जुड़ी पुरानी परंपराओं और महिलाओं के अधिकारों को लेकर हुए बदलाव को समझना जरूरी है।
- कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर परिसर में स्थापित बड़ी संख्या में शिवलिंगों के लिए प्रसिद्ध है। यहां विशाल शिवलिंग के दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।
मंदिर में शिवभक्ति, धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष पूजा का महत्व है। हालांकि, महिलाओं के प्रवेश पर सामान्य प्रतिबंध होने के दावे की पुष्टि के लिए विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि इस मंदिर के आंतरिक हिस्सों में महिलाओं का प्रवेश सभी परिस्थितियों में वर्जित है।
श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन के लिए जाने से पहले वहां के वर्तमान नियमों और विशेष अनुष्ठानों से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी लेनी चाहिए।
- मूकाम्बिका मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक के उडुपी क्षेत्र के निकट कोल्लूर में स्थित मूकाम्बिका मंदिर मां मूकाम्बिका को समर्पित है। पश्चिमी घाट के प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर दक्षिण भारत के प्रमुख शक्तिपीठों और देवी उपासना के प्रसिद्ध केंद्रों में गिना जाता है।
नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में देवी की पूजा, विशेष अनुष्ठान और पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं का पालन किया जाता है।
हालांकि, मंदिर में महिलाओं के सामान्य प्रवेश पर प्रतिबंध होने या किसी विशेष आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश नहीं मिलने के दावे की पुष्टि नहीं होती। इसलिए इस मंदिर को महिलाओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध वाले मंदिरों की सूची में शामिल करना उचित नहीं है।
धार्मिक परंपराओं के साथ नियमों की सही जानकारी भी जरूरी
भारत के मंदिरों में पूजा-पद्धति और प्रवेश से जुड़े नियम अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर विशेष अनुष्ठानों या धार्मिक मान्यताओं के कारण अलग व्यवस्थाएं रही हैं, जबकि कुछ मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े पुराने प्रतिबंधों में बदलाव भी हुआ है।
सबरीमाला और शनि शिंगणापुर जैसे मंदिरों के उदाहरण बताते हैं कि धार्मिक परंपराओं के साथ महिलाओं के अधिकारों और कानूनी फैसलों को लेकर भी व्यापक चर्चा होती रही है। ऐसे में किसी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध होने की जानकारी देते समय उसके वर्तमान नियमों, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
