आज के डिजिटल दौर में सोने से पहले मोबाइल चलाना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। कई लोग कुछ मिनटों के लिए सोशल मीडिया खोलते हैं, लेकिन रील्स, वायरल वीडियो और लगातार बदलती खबरें देखते-देखते घंटों बिता देते हैं। इस आदत को डूमस्क्रॉलिंग (Doomscrolling) कहा जाता है। खासकर रात के समय लगातार फोन इस्तेमाल करने से नींद का समय प्रभावित हो सकता है और तनाव बढ़ने की आशंका रहती है। अगर आप भी बिस्तर पर लेटने के बाद फोन स्क्रॉल करना बंद नहीं कर पाते, तो कुछ आसान डिजिटल आदतें अपनाकर इस पर नियंत्रण पा सकते हैं।
क्या है डूमस्क्रॉलिंग और क्यों बनती जा रही है यह आदत?
डूमस्क्रॉलिंग का मतलब है सोशल मीडिया, न्यूज फीड या दूसरी डिजिटल सामग्री को लगातार स्क्रॉल करते रहना, खासकर तब जब उसमें नकारात्मक, डराने वाली या तनाव बढ़ाने वाली खबरें हों। हालांकि, यह आदत केवल नकारात्मक खबरों तक सीमित नहीं है। लगातार रील्स और शॉर्ट वीडियो देखते रहना भी सोने के समय को बढ़ा सकता है।
इसका एक बड़ा कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार मिलने वाला नया कंटेंट है। हर कुछ सेकंड में नया वीडियो या पोस्ट सामने आने से व्यक्ति को लगता है कि अगली सामग्री भी देख लेनी चाहिए। इसी चक्कर में कुछ मिनटों का स्क्रीन टाइम घंटों में बदल जाता है।
देर रात तक फोन चलाने से सोने का समय टल सकता है। स्क्रीन की रोशनी, मानसिक उत्तेजना और लगातार नोटिफिकेशन भी आराम करने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं। यदि यह आदत नियमित हो जाए, तो अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी महसूस हो सकती है।
1. सोने से एक घंटा पहले बंद कर दें फोन
अगर आप रात में घंटों तक रील्स देखते रहते हैं, तो सबसे पहले सोने से पहले फोन इस्तेमाल करने की समय-सीमा तय करें। कोशिश करें कि सोने से करीब 30 से 60 मिनट पहले सोशल मीडिया और मनोरंजन से जुड़ी स्क्रीन गतिविधियां बंद कर दें।
इस दौरान किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना, अगले दिन की तैयारी करना या कुछ देर शांत बैठना बेहतर विकल्प हो सकते हैं। शुरुआत में फोन से दूरी बनाना मुश्किल लग सकता है, इसलिए स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे कम करना भी उपयोगी हो सकता है।
2. मोबाइल में ऑन करें ग्रेस्केल मोड
रंगीन स्क्रीन और आकर्षक वीडियो कई लोगों को लगातार फोन देखने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे में स्मार्टफोन का ग्रेस्केल मोड (Grayscale Mode) मददगार साबित हो सकता है।
इस मोड को चालू करने पर फोन की स्क्रीन ब्लैक एंड व्हाइट दिखाई देती है। इससे रंगों का आकर्षण कम हो सकता है और कुछ लोगों के लिए फोन इस्तेमाल करने की इच्छा पर नियंत्रण रखना आसान हो सकता है।
इसके लिए फोन की सेटिंग्स में Accessibility या Display से जुड़े विकल्प देखें। अलग-अलग स्मार्टफोन में इस फीचर का नाम और इसे चालू करने का तरीका अलग हो सकता है। ध्यान रखें कि ग्रेस्केल मोड कोई निश्चित इलाज नहीं है, बल्कि स्क्रीन इस्तेमाल करने की आदत बदलने का एक छोटा उपाय है।
3. अलार्म के लिए फोन नहीं, साधारण अलार्म क्लॉक रखें
बहुत से लोग सुबह अलार्म बजने के कारण मोबाइल को तकिए के पास या बिस्तर के किनारे रखकर सोते हैं। लेकिन यही सुविधा रात में बार-बार फोन देखने की वजह बन सकती है। नोटिफिकेशन आते ही व्यक्ति सोशल मीडिया खोल लेता है और फिर स्क्रॉलिंग शुरू हो जाती है।
इस आदत को बदलने के लिए साधारण अलार्म क्लॉक का इस्तेमाल करें। इससे सुबह उठने के लिए फोन को पास रखने की जरूरत नहीं होगी। अगर मोबाइल से ही अलार्म लगाना जरूरी है, तो उसे बिस्तर से दूर किसी ऐसी जगह रखें जहां पहुंचने के लिए उठना पड़े।
फोन को दूर रखने से रात में अचानक नींद खुलने पर बिना वजह स्क्रीन चेक करने की आदत कम करने में मदद मिल सकती है।
4. बेडरूम में बनाएं ‘नो-फोन जोन’
रात में फोन इस्तेमाल करने की आदत कम करने के लिए अपने बेडरूम में एक नियम बनाएं कि बिस्तर पर लेटने के बाद सोशल मीडिया नहीं चलाएंगे। संभव हो तो सोने से पहले मोबाइल को दूसरे कमरे में चार्जिंग पर लगा दें।
अगर ऐसा करना संभव नहीं है, तो फोन को बिस्तर से कुछ दूरी पर रखें और अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद कर दें। सोशल मीडिया ऐप्स के लिए डेली टाइम लिमिट भी तय की जा सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि बिस्तर को आराम और नींद से जोड़ें, न कि लगातार वीडियो देखने की जगह बनाएं। नियमित दिनचर्या से इस आदत को बदलना आसान हो सकता है।
5. रात में नकारात्मक खबरों और लगातार रील्स देखने से बचें
दिनभर की थकान के बाद लोग अक्सर मनोरंजन या खबरें देखने के लिए सोशल मीडिया खोलते हैं। लेकिन अगर रात में लगातार तनावपूर्ण खबरें, विवादित पोस्ट या परेशान करने वाले वीडियो देखते रहें, तो मन शांत होने के बजाय अधिक सक्रिय हो सकता है।
इसलिए सोने से पहले खबरें देखने की समय-सीमा तय करें और बार-बार न्यूज फीड रिफ्रेश करने से बचें। अगर किसी खबर को देखकर बेचैनी बढ़ती है, तो उससे कुछ समय के लिए दूरी बनाना बेहतर हो सकता है।
सोने से पहले गहरी सांस लेने का अभ्यास, हल्की स्ट्रेचिंग या शांत वातावरण में कुछ समय बिताना भी आराम करने में मदद कर सकता है।
डूमस्क्रॉलिंग की आदत से छुटकारा पाने के लिए क्या करें?
रात में फोन इस्तेमाल करने की आदत एक दिन में खत्म होना जरूरी नहीं है। शुरुआत छोटे बदलावों से करें। रोजाना सोने का समय तय करें, फोन के लिए स्क्रीन टाइम लिमिट लगाएं और सोने से पहले एक निश्चित अवधि तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखें।
अगर पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान, बेचैनी, तनाव या नींद से जुड़ी परेशानी बनी रहती है, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
निष्कर्ष: देर रात तक रील्स और सोशल मीडिया स्क्रॉल करना आपकी नींद और दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। ग्रेस्केल मोड, फोन को बिस्तर से दूर रखना, अलार्म क्लॉक का इस्तेमाल और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना इस आदत पर नियंत्रण पाने के आसान तरीके हैं। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप अपनी नींद और मानसिक सुकून को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है, चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। लगातार नींद या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
