नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के 42 वर्षों की सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने पर एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाल ली है। एपी सिंह की विदाई सैन्य परंपराओं के अनुरूप हुई। उन्होंने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद नई दिल्ली स्थित एयर फोर्स स्टेशन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
एपी सिंह के कार्यकाल में भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका भी उनके कार्यकाल के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रही। अब वायुसेना की कमान आशुतोष दीक्षित के हाथों में है, जिनके पास लड़ाकू विमानों के संचालन, परीक्षण, प्रशिक्षण और सैन्य रणनीति का व्यापक अनुभव है।
42 साल की सेवा के बाद एपी सिंह को सम्मानजनक विदाई
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने चार दशकों से अधिक समय तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वायुसेना के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी 30 अक्टूबर को एपी सिंह से मुलाकात कर उनके नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्र के प्रति योगदान की सराहना की थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के सफल क्रियान्वयन और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
एपी सिंह की सेवानिवृत्ति के साथ वायुसेना में एक अनुभवी सैन्य नेतृत्वकर्ता का कार्यकाल समाप्त हुआ है। उनके बाद अब आशुतोष दीक्षित पर वायुसेना की रणनीतिक तैयारियों और परिचालन क्षमता को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
ऑपरेशन सिंदूर रहा एपी सिंह के कार्यकाल का अहम पड़ाव
एपी सिंह के कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सैन्य इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल रहा। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।
इस अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। भारत की कार्रवाई का उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को नुकसान पहुंचाना और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देना था।
ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त अभियान क्षमता और रणनीतिक तैयारियों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया। एपी सिंह के कार्यकाल में इस अभियान को वायुसेना की परिचालन क्षमता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया।
कौन हैं नए वायुसेना प्रमुख आशुतोष दीक्षित?
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारियों में शामिल हैं। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था।
वह एक कुशल फाइटर पायलट होने के साथ क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने मिराज-2000, मिग सीरीज के विभिन्न विमानों, जगुआर, किरण, हॉक, तेजस और आईएल-78 जैसे विमानों पर उड़ान भरी है।
विभिन्न प्रकार के विमानों पर उनका अनुभव उन्हें वायुसेना के संचालन, प्रशिक्षण और तकनीकी परीक्षण से जुड़े मामलों की गहरी समझ प्रदान करता है।
कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में निभाई भूमिका
आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर लड़ाकू विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर सहित विभिन्न सैन्य अभियानों तथा अभ्यासों में भूमिका निभाई है।
वह पश्चिमी क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण फाइटर एयरबेस और दक्षिणी क्षेत्र के फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाल चुके हैं। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वह वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत थे।
इसके अलावा उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, बांग्लादेश और नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उनके अनुभव को देखते हुए वायुसेना की परिचालन तैयारियों, आधुनिक युद्ध तकनीकों और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के बीच नई जिम्मेदारी
भारतीय वायुसेना में नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय में हुआ है, जब आधुनिक युद्ध में लड़ाकू विमानों, निगरानी प्रणालियों, सटीक हमले की क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
एपी सिंह के कार्यकाल में वायुसेना ने महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। अब आशुतोष दीक्षित के सामने इस क्षमता को आगे बढ़ाने, सैन्य तैयारियों को मजबूत करने और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप वायुसेना को तैयार रखने की जिम्मेदारी होगी।
वायुसेना प्रमुख का पदभार संभालने के साथ आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के नेतृत्व की नई जिम्मेदारी में आ गए हैं। उनके व्यापक उड़ान अनुभव और विभिन्न कमान पदों पर काम करने की पृष्ठभूमि से वायुसेना की भविष्य की रणनीतिक दिशा को महत्वपूर्ण आधार मिलने की उम्मीद है।
