तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी देने वाला एक विशाल बिलबोर्ड लगाया गया है। इस पर बड़े अक्षरों में ‘We Will Kill Trump’ यानी ‘हम ट्रंप को मार डालेंगे’ लिखा गया है। बिलबोर्ड में ट्रंप को जेल की सलाखों के पीछे कैदी के रूप में दिखाया गया है। इसके साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की खून से सनी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई हैं।
3 नवंबर को तेहरान के मशहूर एंगलाब स्क्वायर पर लगाए गए इस बिलबोर्ड को अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान के कड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर ईरान इस तरह के पोस्टर लगाकर अमेरिका को क्या संदेश देना चाहता है और क्या दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाओं पर इसका असर पड़ेगा?
एंगलाब स्क्वायर पर उमड़ी भीड़, लगे खून बहने के नारे
बिलबोर्ड में डोनाल्ड ट्रंप का सिर झुका हुआ दिखाया गया है और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे खड़ा दर्शाया गया है। आसपास के पोस्टरों में ट्रंप, जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और बेंजामिन नेतन्याहू के चेहरे खून से सने हुए नजर आते हैं। इनके पीछे अमेरिका और इजराइल के फटे हुए झंडे भी दिखाए गए हैं।
इस दौरान एंगलाब स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में लाल झंडे थे और वे ‘There Will Be Blood’ यानी ‘खून बहेगा’ जैसे नारे लगा रहे थे। प्रदर्शन में शामिल लोग ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की मांग कर रहे थे।
पहले भी ट्रंप के खिलाफ लगाए जा चुके हैं पोस्टर
ईरान में ट्रंप के खिलाफ इस तरह के पोस्टर पहली बार नहीं लगाए गए हैं। अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से तेहरान में कई बार इस तरह के पोस्टर और म्यूरल देखने को मिले हैं। कहीं ट्रंप को ताबूत से बाहर निकलते हुए दिखाया गया, तो कहीं उन्हें जेल की कोठरी में बंद कैदी के रूप में प्रदर्शित किया गया।
2 नवंबर को तेहरान के ताजरीश स्क्वायर में एक आर्ट एग्जिबिशन भी आयोजित की गई थी। इसमें ट्रंप की खून से सनी तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। एक तस्वीर में उनके चेहरे पर पैर रखा हुआ दिखाया गया, जबकि दूसरी तस्वीर में बम से उनका चेहरा ढका हुआ था।
दरअसल, ईरान में सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के पोस्टर और म्यूरल लंबे समय से राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। इनका उद्देश्य समर्थकों में जोश पैदा करना और विरोधी देशों के प्रति अपना रुख प्रदर्शित करना होता है।
एक तरफ धमकी, दूसरी तरफ समझौते की बातचीत
इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक तरफ तेहरान की सड़कों पर अमेरिका के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए समझौते की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि ईरान के साथ समझौता संभव है। 2 नवंबर को भी उन्होंने दोनों देशों के बीच डील होने की संभावना जताई थी। इस बातचीत में कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। कतर के माध्यम से दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है। 3 नवंबर को कतर ने भी उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान किसी अंतरिम समझौते तक पहुंच सकते हैं।
क्या हैं ईरान की शर्तें?
समझौते को लेकर ईरान की कुछ प्रमुख मांगें सामने आई हैं। ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए। इसके अलावा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जाए और विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को भी जारी किया जाए।
इसके बदले ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत करने के लिए तैयार हो सकता है। हालांकि, इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है।
समझौते की चर्चा के बीच अमेरिका ने किया सैन्य हमला
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के बीच 2 नवंबर को अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर सीमित हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों ने इन हमलों को रक्षात्मक कार्रवाई बताया। उनका दावा था कि ईरान की ओर से अमेरिकी विमानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का खतरा था, जिसके चलते वहां मौजूद मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन हमलों का उद्देश्य बड़े पैमाने पर युद्ध को दोबारा शुरू करना नहीं था। दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने कहा कि जब तक सैन्य हमले पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव भी बने चर्चा का विषय
इस बीच 3 नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव भी हुए। इन चुनावों में राष्ट्रपति का चयन नहीं होता, बल्कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की सीटों के लिए मतदान होता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने दोनों सदनों में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है। शुरुआती चुनावी रुझानों में डेमोक्रेट्स को कुछ अहम सीटों पर सफलता मिलने की खबरें सामने आई हैं।
कुल मिलाकर, तेहरान में ट्रंप के खिलाफ लगाए गए धमकी भरे बिलबोर्ड, अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और कतर के जरिए चल रही कूटनीतिक बातचीत ने अमेरिका-ईरान तनाव को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
