आज के डिजिटल दौर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ठग अनजान मोबाइल नंबरों से कॉल करके लोगों को बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या अन्य परिचित संस्थानों का प्रतिनिधि बताकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर रहे हैं। ऐसे में मोबाइल यूजर्स को सुरक्षित रखने के लिए टेलीकॉम सेक्टर में Calling Name Presentation (CNAP) नाम की नई सुविधा शुरू की जा रही है। इस सर्विस के जरिए अब अनजान नंबर से कॉल आने पर मोबाइल स्क्रीन पर सिर्फ नंबर ही नहीं, बल्कि कॉल करने वाले व्यक्ति का रजिस्टर्ड नाम भी दिखाई देगा।
क्या है CNAP सर्विस?
CNAP का पूरा नाम Calling Name Presentation है। यह एक टेलीकॉम सुविधा है, जिसके तहत किसी व्यक्ति के मोबाइल पर कॉल आने पर कॉल करने वाले का नाम और मोबाइल नंबर दोनों दिखाई देंगे। अभी तक अनजान नंबर से कॉल आने पर ज्यादातर स्मार्टफोन में केवल मोबाइल नंबर दिखाई देता है। ऐसे में लोग कॉल करने वाले की पहचान के लिए Truecaller जैसे थर्ड पार्टी ऐप का इस्तेमाल करते हैं।
CNAP के तहत यह जानकारी सीधे टेलीकॉम नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियां अपने ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड में दर्ज नाम का इस्तेमाल करेंगी। यानी कॉल करने वाले व्यक्ति के मोबाइल कनेक्शन के आधिकारिक रिकॉर्ड में जो नाम दर्ज होगा, वही रिसीवर की स्क्रीन पर दिखाई दे सकता है।
कैसे काम करेगी CNAP सुविधा?
CNAP सर्विस में टेलीकॉम ऑपरेटर की भूमिका अहम होगी। जब कोई व्यक्ति दूसरे मोबाइल नंबर पर कॉल करेगा, तो नेटवर्क कॉल करने वाले नंबर से जुड़ी KYC जानकारी के आधार पर उसका रजिस्टर्ड नाम रिसीवर तक पहुंचाएगा।
इस सुविधा के प्रमुख फायदे हैं:
1. अनजान नंबर से कॉल आने पर कॉलर का रजिस्टर्ड नाम दिखाई देगा।
2. फर्जी पहचान बताकर कॉल करने वाले लोगों को पहचानने में मदद मिल सकती है।
3. बैंक और सरकारी विभागों के नाम पर होने वाली कुछ तरह की धोखाधड़ी से सतर्क रहने में सहायता मिलेगी।
4. कॉल रिसीव करने से पहले व्यक्ति को नंबर के साथ नाम की जानकारी भी मिल सकेगी।
CNAP और Truecaller में क्या है अंतर?
CNAP को कई लोग सरकारी Truecaller कह रहे हैं, लेकिन दोनों सेवाओं के काम करने का तरीका अलग है।
Truecaller अपने डेटाबेस, यूजर रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर कॉल करने वाले का नाम बताता है। वहीं CNAP में नाम टेलीकॉम ऑपरेटर के आधिकारिक KYC रिकॉर्ड से लिया जाएगा।
Truecaller में स्पैम कॉल की पहचान, नंबर ब्लॉक करने और बिजनेस कॉलर की जानकारी जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसके मुकाबले CNAP का मुख्य उद्देश्य कॉल करने वाले नंबर के साथ उसका रजिस्टर्ड नाम दिखाना है।
क्या CNAP से पूरी तरह रुक जाएगी साइबर ठगी?
CNAP सुविधा से अनजान नंबरों की पहचान करने में मदद जरूर मिल सकती है, लेकिन इसे साइबर ठगी रोकने का पूरी तरह कारगर समाधान नहीं माना जा सकता। ठग फर्जी पहचान, दूसरे व्यक्तियों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड और अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसलिए मोबाइल यूजर्स को सावधान रहना जरूरी है। किसी भी अनजान कॉल पर OTP, बैंक खाते की जानकारी, ATM PIN या UPI PIN साझा न करें। किसी के कहने पर अनजान लिंक पर क्लिक न करें और पैसे ट्रांसफर करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान की पुष्टि जरूर करें।
CNAP से कॉल करने वाले की पहचान करना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा के लिए सतर्कता और सावधानी अब भी सबसे जरूरी है।
