बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, बुखार और नाक बंद होने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। कई बार लोगों को लंबे समय तक नाक बहने या बंद रहने की परेशानी होती है, जिसे वे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हर बार ये लक्षण सामान्य जुकाम के ही नहीं होते, बल्कि कुछ मामलों में साइनसाइटिस का संकेत भी हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य सर्दी-जुकाम और साइनस संक्रमण के लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं। यही वजह है कि दोनों के बीच अंतर करना कई बार मुश्किल हो जाता है। खास बात यह है कि वायरल जुकाम के दौरान भी साइनस में सूजन आ सकती है। इसलिए केवल नाक बहने या बलगम के रंग के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को बैक्टीरियल साइनस संक्रमण है या नहीं।
जुकाम और साइनस की समस्या में क्या है अंतर?
सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होने वाला ऊपरी श्वसन तंत्र का संक्रमण है। इसमें नाक बहना, छींक आना, गले में खराश, खांसी और नाक बंद होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। आमतौर पर शुरुआती दो से तीन दिनों में ये लक्षण अधिक परेशान करते हैं और धीरे-धीरे राहत मिलने लगती है।
वहीं, साइनसाइटिस में नाक के आसपास मौजूद हवा से भरी छोटी-छोटी गुहाओं यानी साइनस की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है। इस सूजन के कारण बलगम की निकासी प्रभावित होती है। इससे नाक बंद रहने, चेहरे पर दबाव महसूस होने, माथे या गालों में दर्द और गले के पीछे बलगम गिरने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
जुकाम के दौरान भी हो सकती है साइनस में सूजन
जुकाम और साइनस के लक्षण एक जैसे होने की बड़ी वजह यह है कि सर्दी-जुकाम पैदा करने वाले वायरस भी साइनस की अंदरूनी परत में सूजन पैदा कर सकते हैं। इसका मतलब है कि साइनस की हर समस्या बैक्टीरिया के कारण नहीं होती।
मायो क्लिनिक के अनुसार, सामान्य सर्दी-जुकाम एक्यूट साइनसाइटिस का आम कारण है। अधिकतर मामलों में इसके लक्षण लगभग एक सप्ताह से 10 दिनों के भीतर ठीक होने लगते हैं। हालांकि, ठीक होने में लगने वाला समय व्यक्ति की स्थिति और संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर कर सकता है।
नाक बहना कब सामान्य जुकाम और कब साइनस का संकेत?
सामान्य जुकाम में छींक आना, गले में खराश, नाक बहना, खांसी और हल्का बदन दर्द जैसे लक्षण प्रमुख होते हैं। आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर राहत मिलने लगती है, हालांकि खांसी कुछ समय तक बनी रह सकती है।
दूसरी ओर, यदि नाक बंद रहने या बलगम निकलने के साथ माथे, गालों या आंखों के आसपास दबाव और दर्द महसूस हो, तो यह साइनसाइटिस का संकेत हो सकता है। इसके अलावा गले के पीछे बलगम गिरना और सूंघने की क्षमता कम होना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं।
किन परिस्थितियों में बढ़ जाती है बैक्टीरियल साइनस की आशंका?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, कुछ स्थितियों में बैक्टीरियल साइनस संक्रमण की आशंका बढ़ सकती है। इनमें शामिल हैं:
1\. लक्षण 10 दिन या उससे अधिक समय तक बने रहें और उनमें कोई सुधार न हो।
2\. शुरुआत में जुकाम के लक्षण कम होने लगें, लेकिन कुछ समय बाद नाक से स्राव, सिरदर्द या बुखार जैसी परेशानियां दोबारा बढ़ जाएं।
3\. शुरुआत से ही तेज बुखार, नाक से गाढ़ा स्राव और चेहरे में दर्द लगातार कई दिनों तक बना रहे।
इन लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी का पता लगाना सही नहीं है। डॉक्टर मरीज की स्थिति और लक्षणों का आकलन करके तय करते हैं कि संक्रमण वायरल है या बैक्टीरियल। हर साइनस संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत नहीं होती।
पीला या हरा बलगम क्या साइनस संक्रमण का संकेत है?
अक्सर लोग पीले या हरे रंग का बलगम देखकर मान लेते हैं कि उन्हें बैक्टीरियल संक्रमण हो गया है। हालांकि, बलगम का रंग अपने आप में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि नहीं करता। वायरल जुकाम के दौरान भी बलगम का रंग बदल सकता है।
इसलिए बीमारी की पहचान केवल बलगम के रंग से नहीं, बल्कि लक्षणों की अवधि, उनकी गंभीरता और समय के साथ उनमें होने वाले बदलाव के आधार पर की जाती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी?
यदि नाक बंद रहने, चेहरे में दर्द या दबाव और बलगम गिरने जैसे लक्षण 10 दिन से अधिक समय तक बने रहें, उनमें सुधार न हो या ठीक होने के बाद दोबारा बिगड़ जाएं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, आंखों के आसपास सूजन या नजर में बदलाव होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
कुल मिलाकर, सामान्य सर्दी-जुकाम और साइनसाइटिस के लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं। जुकाम के दौरान भी साइनस में सूजन आना संभव है। ऐसे में लंबे समय तक नाक बंद रहने, चेहरे में दबाव या दर्द और बार-बार लक्षण बिगड़ने पर इसे सामान्य जुकाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने या लंबे समय तक बने रहने पर चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।
