छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए भिलाई और रायपुर में छापेमारी की। जांच एजेंसी ने भिलाई स्थित पूर्व CGPSC सचिव जेके ध्रुव और रायपुर स्थित पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के निवास पर दबिश दी।
जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम सुबह करीब छह बजे चार वाहनों में भिलाई पहुंची और सेक्टर-10 स्थित जेके ध्रुव के घर पर जांच शुरू की। टीम वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। इसी तरह रायपुर में आरती वासनिक के निवास पर भी ईडी अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है।
CGPSC भर्ती घोटाले की जांच में पहले से ही कई गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी CBI की जांच में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं और प्रभावशाली लोगों के परिजनों तथा रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाया गया।
जांच में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की भूमिका भी सामने आई थी। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया। मामले में एक निजी कंपनी से CSR मद के तहत 45 लाख रुपये एक ऐसे एनजीओ को दिए जाने का भी आरोप है, जिसकी अध्यक्ष उनकी पत्नी थीं। इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
CBI इस मामले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और श्रवण कुमार गोयल को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी ने यह मामला जुलाई 2024 में दर्ज किया था।
बताया जाता है कि 2020 से 2022 के बीच आयोजित CGPSC परीक्षाओं में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। कई चयनित अभ्यर्थियों के प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंध होने के आरोप लगे थे, जिसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। अब ईडी वित्तीय पहलुओं और कथित धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एंगल से जांच को आगे बढ़ा रही है।
