फ्रांस और यूक्रेन के बीच राफेल F-4 लड़ाकू विमानों की बड़ी रक्षा डील हुई है। समझौते के तहत यूक्रेन 16 अत्याधुनिक राफेल फाइटर जेट खरीदेगा, जिनकी डिलीवरी वर्ष 2028 से 2029 के बीच शुरू होने की संभावना है। यह सौदा दोनों देशों के बीच वर्ष 2025 में हुए रक्षा सहयोग समझौते के तहत पहली बड़ी डील माना जा रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अनुसार, यूक्रेनी पायलटों को राफेल उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। योजना के मुताबिक वर्ष 2035 तक यूक्रेन के बेड़े में राफेल विमानों की संख्या 100 तक पहुंच सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन में राफेल की सीधी चुनौती रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57 और Su-35 से होगी। Su-57 को अधिक शक्तिशाली रडार, अधिक हथियार ले जाने की क्षमता और लंबी दूरी तक संचालन जैसी खूबियों के कारण तकनीकी रूप से मजबूत माना जाता है।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आधुनिक एवियोनिक्स, उन्नत मिसाइल प्रणाली और बहुउद्देशीय क्षमता के कारण राफेल यूक्रेनी वायुसेना की ताकत को काफी बढ़ाएगा और रूस के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है।
इस रक्षा सौदे का भारत से भी विशेष संबंध है। भारतीय वायुसेना पहले से राफेल का संचालन कर रही है, जबकि भारत और रूस के बीच Su-57 लड़ाकू विमान को लेकर भी बातचीत जारी है। साथ ही भारत फ्रांस के साथ अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद और तकनीक हस्तांतरण पर भी चर्चा कर रहा है।
