आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका **”आपातकाल के योद्धा”** का विमोचन किया तथा आपातकाल विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा दौर है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन यातनाएं सहकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की और उनका त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि युवाओं को लोकतंत्र और स्वतंत्रता के महत्व से अवगत कराने का माध्यम हैं। मुख्यमंत्री ने आपातकाल से जुड़ी अपने परिवार की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय 19 महीने तक जेल में रहे थे और उस समय लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
समारोह के मुख्य वक्ता श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने का मूल्य है। उन्होंने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र की कठिन परीक्षा बताते हुए कहा कि उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा था। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने, सामाजिक समरसता, स्वच्छता और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों के बल पर विश्व में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था। प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह दौर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की सीख देता है।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कैलाश सोनी, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्रीमती गोमती साय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यालय वर्ग में रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि महाविद्यालय वर्ग में रायपुर की सुश्री कल्याणी पटले प्रथम रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति युवाओं की जागरूकता की सराहना की।
