सोनमणि बोरा ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी अनुशासित एवं संकल्पित होकर संवेदनशीलता के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए कार्य करें। उन्होंने अवैध नशीली दवाइयों की रोकथाम के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
दुर्ग जिले में आयोजित नारकोटिक्स नियंत्रण एवं नशामुक्ति अभियान की समीक्षा बैठक में प्रभारी सचिव श्री बोरा ने मादक पदार्थों की रोकथाम, नशामुक्ति केंद्रों की व्यवस्थाओं तथा विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही कार्यवाहियों की जानकारी ली। बैठक में अभिजीत सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
प्रभारी सचिव ने समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को समन्वय बनाकर संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति केंद्रों में पीड़ितों को तीन माह तक रखने की वर्तमान अवधि को बढ़ाने पर भी विचार किया जाए। साथ ही विभिन्न आयु वर्ग के पीड़ितों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
श्री बोरा ने नशे की लत छोड़ चुके लोगों की सफलता की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर जोर दिया। उन्होंने छोटे-छोटे वीडियो और क्लिप्स तैयार कर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचे और अन्य लोग भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित हों।
बैठक में पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2026 में एनडीपीएस एक्ट एवं नारकोटिक्स एक्ट के तहत 68 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में गांजा, हेरोइन, नशीली दवाइयां, अफीम और डोडा समेत विभिन्न मादक पदार्थों की जब्ती की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 9 लाख 25 हजार रुपये है। उन्होंने बताया कि पीआईटी एनडीपीएस के तहत 9 प्रकरण तैयार किए गए हैं तथा 36 वाहनों की नीलामी भी की गई है।
खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि जनवरी से अप्रैल 2026 तक 715 स्थानों पर निरीक्षण किए गए। अनियमितता पाए जाने पर 32 नोटिस जारी किए गए, जबकि नारकोटिक्स दवाइयों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर 4 मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त रूप से 11 कार्रवाइयां भी की गई हैं।
प्रभारी सचिव ने निर्देश दिए कि स्वापक एवं मनः प्रभावी औषधियों के विक्रय और वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जाए। साथ ही नियमित भौतिक सत्यापन और अवैध सप्लाई करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
