नई दिल्ली, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण पर जवाब देते हुए आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर, मानवाधिकार और पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने 26 सितंबर को राइट ऑफ रिप्लाई के तहत भारत का पक्ष रखा।
भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति का मुद्दा उठाया। पेटल गहलोत ने रावलकोट के लोगों का जिक्र करते हुए वहां कथित हिंसा, हत्याओं और बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों का उल्लेख किया। साथ ही भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भारत पर भी आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं।
भारत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। गहलोत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कानूनी मुकदमों से आजीवन छूट दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
### 9/11 और ओसामा बिन लादेन का भी जिक्र
भारत ने 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी का उल्लेख करते हुए ओसामा बिन लादेन का मुद्दा भी उठाया। पेटल गहलोत ने कहा कि 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में एक सैन्य अकादमी के पास रह रहा था। यह टिप्पणी शहबाज शरीफ द्वारा 2025 के तनाव के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की प्रशंसा किए जाने के संदर्भ में की गई।
### आतंकवाद पर भारत की चेतावनी
भारत ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर अपने आत्मरक्षा के अधिकार का उल्लेख किया और 7 मई 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। भारत के अनुसार यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई थी। गहलोत ने कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद जारी रखता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
### धार्मिक असहिष्णुता का मुद्दा भी उठा
भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। गहलोत ने ईशनिंदा कानून और कट्टरता से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान के बयानों पर सवाल खड़े किए। भारत ने कहा कि ऐसे मुद्दों के बीच पाकिस्तान को दूसरे देशों को धार्मिक सहिष्णुता पर उपदेश देने से पहले अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
