महासमुंद में करीब 1.5 करोड़ रुपये कीमत की 92 टन एलपीजी गैस चोरी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले में अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और कूटरचना के जरिए 92 टन एलपीजी गैस बेचने की साजिश रची थी। चोरी की गई गैस के लिए ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ 80 लाख रुपये में सौदा किया गया था।
पैसों का हुआ था बंटवारा
जांच में सामने आया है कि डील के एवज में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को 50 लाख रुपये नकद दिए गए थे। वहीं 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर और 10 लाख रुपये मनीष चौधरी को मिले थे।
पुलिस ने मामले में कुल 6 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें से 4 गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि 2 आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
कई धाराओं में मामला दर्ज
सिंघोड़ा थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और ईसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया था। संभावित हादसे से बचने के लिए पुलिस ने ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था।
इसके बाद खाद्य विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित रखने के लिए कहा। इसके बाद ट्रकों को सिंघोड़ा थाना से अभनपुर के ग्राम उरला स्थित प्लांट ले जाया गया।
पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और मामले की आगे जांच जारी है।
