महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक सशक्तिकरण ही आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के समग्र विकास और स्वावलंबन के लिए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य कर रही है।
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कुरुषनार में आयोजित महतारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने महिलाओं से अधिक से अधिक संख्या में स्व-सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार आधारित गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समूहों की सामूहिक शक्ति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और मजबूती प्रदान कर रही है।
सम्मेलन के दौरान ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मंत्री का स्वागत किया। महिलाओं ने महतारी वंदन योजना और स्व-सहायता समूहों से जुड़ने के बाद अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को साझा करते हुए बताया कि योजनाओं से मिली आर्थिक सहायता और आजीविका गतिविधियों ने उनकी आय बढ़ाने तथा परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जानकारी दी कि महतारी वंदन योजना का पोर्टल शीघ्र ही पुनः प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने पात्र महिलाओं से अपील की कि जो महिलाएं अब तक किसी कारणवश योजना से नहीं जुड़ सकी हैं, वे पोर्टल खुलते ही अपना पंजीयन कराकर योजना का लाभ प्राप्त करें। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी पात्र हितग्राहियों का समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
महतारी सम्मेलन के दौरान महिलाओं ने प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें संस्करण का सामूहिक श्रवण भी किया। कार्यक्रम में महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कंदाड़ी ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम कुरुषनार की 76 वर्षीय रासोबाई, 76 वर्षीय सुगदई और 73 वर्षीय मोटेबाई को समाज कल्याण विभाग की ओर से सहायक छड़ी वितरित की। उन्होंने आंगनबाड़ी परिसर में मुनगा का पौधरोपण कर पोषण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
मंत्री ने सत्य साई अस्पताल, रायपुर में हृदय का सफल ऑपरेशन करा चुकी आंगनबाड़ी की छात्रा कुमारी अनुष्का से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, स्वावलंबन और सशक्तिकरण से गांवों के विकास को नई गति मिलेगी तथा आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।
