गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल Rajiv Lochan Temple महानदी के तट पर स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है। गरियाबंद जिले के राजिम नगर में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी स्थापत्य कला, धार्मिक मान्यताओं तथा त्रिवेणी संगम के कारण देशभर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
राजिम को छत्तीसगढ़ का “प्रयाग” कहा जाता है, क्योंकि यहां Mahanadi River, Pairi River और Sondur River का संगम होता है। इस त्रिवेणी संगम के कारण यह स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु यहां अस्थि विसर्जन, पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं।
मंदिर परिसर के समीप संगम के मध्य स्थित Kuleshwar Mahadev Temple भी विशेष श्रद्धा का केंद्र है। मान्यता है कि वनवास काल में भगवान राम ने यहां अपने कुलदेवता भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस क्षेत्र का प्राचीन नाम “कमलक्षेत्र” था। कहा जाता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु की नाभि से निकला कमल यहीं प्रकट हुआ था और भगवान ब्रह्मा ने यहीं से सृष्टि की रचना की थी। इसी कारण इस क्षेत्र को कमलक्षेत्र के नाम से जाना गया।
हर वर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक यहां भव्य Rajim Kumbh का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर से साधु-संत और लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
यातायात की दृष्टि से भी राजिम सुगम है। यह रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा Swami Vivekananda Airport है, जो लगभग 42.5 किलोमीटर दूर है। वहीं Raipur Railway Station से इसकी दूरी करीब 50 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से भी राजिम का संपर्क प्रदेश के प्रमुख शहरों से सुगम रूप से जुड़ा हुआ है।
आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम राजीव लोचन मंदिर को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।
