भारतीय तेज़ गेंदबाज़ मयंक यादव ने चोट के कारण दो साल तक टीम से बाहर रहने के बाद शानदार वापसी करते हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में पहली ही गेंद पर विकेट लेकर सभी का ध्यान खींचा। मैच के बाद उन्होंने कहा कि यह विकेट उनके लंबे संघर्ष और इंतजार का सबसे बड़ा इनाम था।
सिर्फ 22 वर्ष की उम्र में भारत के लिए पदार्पण करने वाले मयंक यादव ने कहा कि चोट के कारण मैदान से दूर रहना उनके करियर का सबसे कठिन दौर था, लेकिन इसी समय ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत और बेहतर क्रिकेटर बनने में मदद की। उन्होंने कहा कि दो साल बाद फिर से भारतीय टीम की जर्सी पहनना और पहली ही गेंद पर विकेट लेना उनके लिए बेहद भावुक पल था।
जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में मयंक यादव ने पहली गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर शानदार शुरुआत की। उन्होंने कहा कि वापसी के दौरान उनका पूरा ध्यान अपनी स्किल और ताकत पर भरोसा रखने पर था। लंबे समय तक चोट से जूझने के बाद दो विकेट हासिल करना उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया।
मयंक यादव ने कहा कि लंबे समय से उन पर अपेक्षाओं और दबाव का बोझ था, लेकिन इस प्रदर्शन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने भारतीय टीम में वापसी कर फिर से योगदान देने पर खुशी जताई।
मुकाबले में मयंक यादव ने दो विकेट झटके, जबकि भारत ने जिम्बाब्वे को 125/7 के स्कोर पर रोक दिया। इसके बाद भारतीय टीम ने 40 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर मुकाबला अपने नाम किया और इस वर्ष टी20 विश्व कप जीतने के बाद अपनी पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय जीत दर्ज की।
