Sukma जिले की 39 वर्षीय सीमा सिंह के लिए बीते पांच साल बेहद पीड़ादायक रहे। माइग्रेन की गंभीर समस्या से जूझ रहीं सीमा ने इलाज के लिए कई बड़े शहरों का रुख किया और एलोपैथी की कई दवाइयों का सहारा लिया, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी। आखिरकार उन्हें राहत मिली सुकमा के “आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक” में, जहां आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म चिकित्सा ने उनकी जिंदगी बदल दी।
पंचकर्म की ‘शिरोधारा’ पद्धति से मिला आराम
4 मई को आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक पहुंचीं सीमा सिंह का इलाज अनुभवी चिकित्सक Dr. Manoranjan Patro की देखरेख में किया गया। लगभग एक सप्ताह तक चले आयुर्वेदिक उपचार, दवाइयों और पंचकर्म की “शिरोधारा” पद्धति से उन्हें वर्षों पुराने माइग्रेन दर्द से राहत मिली।
इलाज के बाद सीमा सिंह ने शासन और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय बाद उन्हें सामान्य और दर्दमुक्त जीवन का अनुभव हो रहा है।
सुकमा में बदल रही स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
सीमा सिंह की कहानी सुकमा जिला प्रशासन के उन प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है, जिनके तहत दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ पारंपरिक पंचकर्म चिकित्सा की शुरुआत भी की गई है।
आयुष चिकित्सालय रविवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन संचालित हो रहा है और यहां प्रतिदिन औसतन 14 से 15 मरीज उपचार प्राप्त कर रहे हैं।
आत्मसमर्पित युवाओं को भी मिला रोजगार
जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ सामाजिक पुनर्वास की दिशा में भी पहल की है। कलेक्टर की विशेष पहल पर दो आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए इसी आयुष चिकित्सालय में “कलेक्टर दर” पर रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
इस पहल को जिले में शांति, पुनर्वास और विकास की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
सुशासन और सामाजिक सुधार का मॉडल बना सुकमा
Vishnu Deo Sai सरकार के सुशासन मॉडल के तहत सुकमा का आयुष चिकित्सालय अब केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि उम्मीद, स्वास्थ्य और पुनर्वास का केंद्र बनकर उभरा है। यहां एक ओर लोगों को आयुर्वेदिक और पंचकर्म उपचार की सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर युवाओं को रोजगार और मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया जा रहा है।
