नई दिल्ली। लो ब्लड प्रेशर यानी हाइपोटेंशन की समस्या सिर्फ बड़ों में ही नहीं, बल्कि बच्चों में भी देखने को मिलती है। हालांकि बच्चों में यह समस्या अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में ब्लड प्रेशर उनकी उम्र, लंबाई और लिंग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
आमतौर पर नवजात शिशुओं में सामान्य ब्लड प्रेशर 60/40 mmHg माना जाता है, जबकि 1 से 5 साल के बच्चों में यह 80/50 से 95/60 mmHg तक हो सकता है। किशोरावस्था में सामान्य ब्लड प्रेशर 110/70 से 120/80 mmHg के बीच माना जाता है।
बच्चों में Low BP के प्रमुख कारण
डिहाइड्रेशन
बच्चों में लो ब्लड प्रेशर का सबसे सामान्य कारण शरीर में पानी की कमी होना है। बार-बार उल्टी, दस्त, तेज बुखार या अधिक पसीना आने से शरीर में तरल पदार्थ कम हो जाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर गिर सकता है।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
शरीर में सोडियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने पर हृदय को पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप करने में कठिनाई होती है। इससे बच्चा सुस्त हो सकता है और उसे चक्कर आ सकते हैं।
संक्रमण
गंभीर संक्रमण की स्थिति में बच्चों में सेप्टिक शॉक जैसी समस्या हो सकती है। इससे शरीर में सूजन बढ़ती है और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर सकता है।
पोषण की कमी
फोलेट और विटामिन B12 की कमी से एनीमिया की समस्या हो सकती है, जिससे शरीर में पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स नहीं बन पाते और ब्लड प्रेशर कम हो सकता है।
हृदय संबंधी समस्याएं
जन्मजात हृदय रोग या हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी के कारण शरीर के अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता, जिससे लो बीपी की स्थिति बन सकती है।
हार्मोनल गड़बड़ी
थायराइड या एड्रिनल ग्लैंड से जुड़ी समस्याएं भी बच्चों में ब्लड प्रेशर कम होने का कारण बन सकती हैं।
लो ब्लड प्रेशर के सामान्य लक्षण
- बार-बार चक्कर आना
- बेहोशी या कमजोरी महसूस होना
- चेहरे का रंग पीला या सफेद पड़ना
- हाथ-पैर ठंडे होना
- धुंधला दिखाई देना
- थकान और सुस्ती
- सांस लेने में परेशानी
- एकाग्रता में कमी
- बार-बार प्यास लगना
गंभीर संकेत जिन्हें तुरंत पहचानना जरूरी
शॉक
जब शरीर के अंगों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, तो शॉक की स्थिति बन सकती है। यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
लगातार बेहोश होना
बार-बार बेहोशी इस बात का संकेत हो सकता है कि दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं पहुंच रहा है।
शरीर का नीला पड़ना
अगर बच्चे के होंठ, नाखून या त्वचा नीली पड़ने लगे, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का गंभीर संकेत हो सकता है।
बच्चों में Low BP की जांच कैसे होती है
- मेडिकल हिस्ट्री की जांच
- अलग-अलग स्थिति में ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग
- ब्लड टेस्ट
- ईसीजी और इकोकार्डियोग्राम
पेरेंट्स क्या करें
संतुलित डाइट दें
डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चे की डाइट में जरूरी पोषक तत्व और पर्याप्त नमक शामिल करें।
बच्चे को हाइड्रेटेड रखें
बच्चों को पर्याप्त पानी, नारियल पानी और तरल पदार्थ दें ताकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे।
छोटे-छोटे मील दें
दिनभर में 5 से 6 बार हल्का भोजन देना बेहतर माना जाता है। इससे ब्लड प्रेशर स्थिर रखने में मदद मिलती है।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं
- बच्चा बार-बार बेहोश हो रहा हो
- सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो रही हो
- खून की उल्टी या काला मल आ रहा हो
- तेज बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते दिखाई दें
- होंठ या नाखून नीले पड़ने लगें
डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में लो ब्लड प्रेशर के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
