प्रदेश में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत शिक्षकों की नई पदस्थापना से गांव और शहर के स्कूलों का माहौल बदल गया है। पहली से लेकर बारहवीं तक के रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति होने से विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। अब दूरस्थ गांवों में भी नियमित शिक्षक पहुंच रहे हैं और उन्हें सम्मान के साथ पहचान मिल रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के दिशा-निर्देशन में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू इस प्रक्रिया से हजारों विद्यालयों में पढ़ाई बेहतर हुई है। प्रदेश के लगभग 6 हजार एकल शिक्षकीय विद्यालयों में अतिशेष शिक्षकों का समायोजन किया गया, जिससे 4721 विद्यालयों को सीधा लाभ मिला। वहीं, पहले 453 शिक्षकविहीन विद्यालय थे, जिनमें से 446 विद्यालयों को अब शिक्षक मिल चुके हैं।
कोरबा जिले में ही 500 से अधिक शिक्षकों को स्कूलों में पदस्थ किया गया है। गणित, रसायन, भौतिकी, हिंदी, अंग्रेजी और कॉमर्स जैसे विषयों के व्याख्याताओं की नियुक्ति से विद्यार्थियों को अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।
विद्यार्थियों में उत्साह, अभिभावकों में संतोष
पंडोपारा जैसे सुदूर अंचलों में भी अब शिक्षा की नई रोशनी पहुंच रही है। पंडो समाज के बच्चे, जो पहले शिक्षक की कमी से जूझते थे, अब नियमित पढ़ाई कर पा रहे हैं। गांव के छात्र–छात्राओं और अभिभावकों ने इस बदलाव पर खुशी जताई है।
इसी तरह करतला ब्लॉक, तिलईडबरा और पोड़ी उपरोड़ा जैसे वनांचल क्षेत्रों के स्कूलों में भी नए शिक्षकों की पदस्थापना हुई है। विद्यार्थी अब कठिन विषयों को आसानी से समझ पा रहे हैं और डॉक्टर, वैज्ञानिक जैसे करियर की दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं।
मानदेय शिक्षक भी निभा रहे अहम भूमिका
जिले में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए डीएमएफ मद से मानदेय पर भी सैकड़ों शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही स्कूल भवन, टॉयलेट, बाउंड्रीवाल, किचन शेड जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
शिक्षा में नए दौर की शुरुआत
नई मैडम और नए सर के आने से न सिर्फ विद्यार्थियों में पढ़ाई को लेकर रुचि बढ़ी है, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह कदम गांव से लेकर शहर तक के बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
