नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच हुई बैठक के बाद यह महत्वपूर्ण सहमति बनी।
दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चांसलर स्टॉकर की यह यात्रा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक अहम मोड़ साबित होगी। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के बड़े पैमाने व तेज विकास का संयोजन एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सप्लाई चेन तैयार कर सकता है।
दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस दौरान Indian Institute of Technology Delhi और Montanuniversität Leoben के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का भी उल्लेख किया गया, जिसे नवाचार और शोध सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में वर्कफोर्स मोबिलिटी और स्किल एक्सचेंज पर भी चर्चा हुई। 2023 के माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश नर्सिंग और अन्य क्षेत्रों में अवसर बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही युवाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए ‘भारत-ऑस्ट्रिया वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम’ शुरू करने की घोषणा की गई है।
वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों ने साझा रुख अपनाया। नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया और यूक्रेन व पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में शांति के प्रयासों का समर्थन किया।
इसके अलावा, भारत और ऑस्ट्रिया ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प भी दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच यह सहयोग केवल आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इस दौरे को भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने और भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
