खार्तूम। गृहयुद्ध की आग में झुलस रहे सूडान से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। उत्तरी दारफुर की राजधानी अल फशर में शुक्रवार तड़के एक मस्जिद पर अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने ड्रोन से हमला कर दिया। इस हमले में कम से कम 75 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं।
नमाज़ के दौरान हुआ हमला
स्थानीय संगठनों के अनुसार, हमला उस वक्त हुआ जब लोग मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। धमाके से मस्जिद के कई हिस्से ढह गए और चारों ओर शव बिखर गए। एक प्रत्यक्षदर्शी संगठन द रेसिस्टेंस कमिटीज इन अल फशर ने एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें खंडहर बनी मस्जिद और मृतकों के शव दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
नागरिकों पर जघन्य अपराध
सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने इस हमले को निहत्थे नागरिकों पर “जघन्य अपराध” करार दिया और कहा कि यह न केवल मानवता और धर्म, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की भी खुली अनदेखी है।

RSF बनाम सेना: गृहयुद्ध का खौफनाक रूप
सूडान में सेना और RSF के बीच अप्रैल 2023 से संघर्ष जारी है, जो अब गृहयुद्ध का रूप ले चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, इस गृहयुद्ध में अब तक 40,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1.2 करोड़ से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। लाखों लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
हालात और बिगड़े
गुरुवार तक संघर्ष ज्यादातर पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों में सीमित था, लेकिन शुक्रवार को RSF ने सीधे आम नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। दारफुर विक्टिम्स सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन ने बताया कि इलाके में जोरदार धमाकों और ड्रोन की आवाज़ें सुनी गईं। रेसिस्टेंस कमेटी का कहना है कि हमले का निशाना बने लोग वे थे जो पहले से ही शिविरों में शरण लेकर रह रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सूडान में हालात कितने भयावह हो चुके हैं। लगातार हो रहे ऐसे हमलों ने न सिर्फ स्थानीय आबादी की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर भी खतरा मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस हमले पर चिंता जताई है और तुरंत मानवीय हस्तक्षेप की मांग की है।
