आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस का काम, लगातार डेडलाइन और घर की जिम्मेदारियां मानसिक थकान बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक बिना ब्रेक काम करने से फोकस कम होने के साथ चिड़चिड़ापन और थकान भी महसूस हो सकती है। ऐसे में टाइम मैनेजमेंट की Pomodoro Technique काम को छोटे हिस्सों में बांटकर बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद कर सकती है।
क्या है Pomodoro Technique?
Pomodoro Technique एक टाइम मैनेजमेंट तरीका है, जिसे इटली के फ्रांसेस्को सिरिलो ने विकसित किया था। ‘Pomodoro’ इटैलियन भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ टमाटर होता है। इस तकनीक में काम को छोटे-छोटे 25 मिनट के सेशन में बांटा जाता है। इस दौरान व्यक्ति सिर्फ एक काम पर ध्यान देता है और फिर छोटा ब्रेक लेता है।
कैसे करें Pomodoro Technique का इस्तेमाल?
1. सबसे पहले दिनभर में किए जाने वाले जरूरी कामों की लिस्ट बनाएं।
2. फोन या टाइमर में 25 मिनट का अलार्म सेट करें।
3. अगले 25 मिनट तक केवल एक काम पर पूरा ध्यान दें। इस दौरान सोशल मीडिया, फोन या दूसरे गैर-जरूरी कामों से दूरी बनाकर रखें।
4. 25 मिनट पूरे होने के बाद करीब 5 मिनट का ब्रेक लें।
5. इसी तरह चार 25 मिनट के सेशन पूरे करने के बाद 15 से 30 मिनट का लंबा ब्रेक लें।
Burnout और तनाव में कैसे मददगार?
Pomodoro Technique में लगातार कई घंटों तक काम करने के बजाय छोटे और निर्धारित अंतराल में काम किया जाता है। इससे व्यक्ति को काम के बीच मानसिक ब्रेक मिलता रहता है।
छोटे ब्रेक लेने से थकान कम महसूस हो सकती है और लंबे समय तक किसी एक काम पर ध्यान बनाए रखना आसान हो सकता है। काम को छोटे हिस्सों में बांटने से बड़ी जिम्मेदारियां भी कम मुश्किल लगती हैं।
इसके प्रमुख फायदे
* काम के दौरान फोकस बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
* लंबे समय तक लगातार काम करने की आदत कम होती है।
* नियमित ब्रेक से मानसिक थकान कम महसूस हो सकती है।
* बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटना आसान होता है।
* ऑफिस और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बीच समय को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है।
हालांकि, Pomodoro Technique हर व्यक्ति के लिए एक जैसी प्रभावी हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों के लिए 25 मिनट की जगह 30 या 45 मिनट का फोकस सेशन ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है। इसलिए अपनी जरूरत और काम की प्रकृति के अनुसार समय में बदलाव किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे किसी डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प न समझें। लंबे समय तक तनाव, अत्यधिक थकान या अन्य परेशानियां बनी रहें तो योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
