बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने शिक्षिकाओं की पोस्टिंग से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शिक्षिका की पसंद के स्कूल में पदस्थापना के अनुरोध पर विचार करें और 45 दिनों के भीतर निर्णय लें। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला राज्य सरकार की तार्किककरण नीति और उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर ही किया जाएगा।
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ में हुई। व्याख्याता स्निग्धा ग्वाल द्वारा दायर याचिका में बताया गया था कि जिन स्कूलों में उनकी पोस्टिंग के आदेश जारी किए गए थे, वहां संबंधित विषय के पद रिक्त नहीं थे, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
याचिकाकर्ता ने शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बालको तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, कटघोरा में जीव विज्ञान व्याख्याता के रिक्त पदों का उल्लेख करते हुए वहां पदस्थापना पर विचार करने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भी रिक्त पदों पर विचार किए जाने को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उपलब्ध रिक्तियों और नियमानुसार स्थिति की जांच करें तथा 45 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लें।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी पदस्थापना का निर्णय राज्य सरकार की तार्किककरण नीति और उपलब्ध रिक्त पदों के अनुरूप ही लिया जाएगा। हाई कोर्ट के इस फैसले से शिक्षिकाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
