नई दिल्ली। महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में भारत की युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब की दौड़ को और रोमांचक बना दिया है। आर वैशाली और दिव्या देशमुख की जीत ने भारतीय उम्मीदों को मजबूती दी है।
छठे दौर में वैशाली ने रूस की कतेरीना लाग्नो के खिलाफ काले मोहरों से खेलते हुए शानदार रणनीति दिखाई। शुरुआत में संतुलित खेल के बाद उन्होंने मध्य खेल में विरोधी की गलतियों का फायदा उठाया। खासतौर पर 29वीं और 38वीं चाल पर हुई चूक मैच का टर्निंग पॉइंट बनी और वैशाली ने मुकाबला अपने नाम कर लिया।
वहीं दिव्या देशमुख ने बिबिसारा असाउबायेवा के खिलाफ उतार-चढ़ाव भरा मुकाबला खेला। एक समय दबाव में आने के बावजूद दिव्या ने संयम बनाए रखा और अंततः 46 चालों में जीत दर्ज की।
इस दौर के बाद महिला वर्ग में अंक तालिका बेहद करीबी हो गई है, जहां शीर्ष पांच खिलाड़ी केवल एक अंक के अंतर पर हैं। ऐसे में वैशाली और दिव्या दोनों के पास खिताब जीतने का सुनहरा मौका बना हुआ है।
हालांकि पुरुष वर्ग में आर प्रज्ञानानंदा को अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी। उन्होंने अमेरिका के हिकारू नाकामुरा के खिलाफ ड्रॉ खेला। काले मोहरों से ड्रॉ करना एक संतुलित परिणाम माना जाता है, लेकिन मौजूदा अंक तालिका में इससे उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ।
फिलहाल उज़्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव बढ़त बनाए हुए हैं, जिससे प्रज्ञानानंदा के लिए आगे की राह चुनौतीपूर्ण हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले राउंड भारतीय खिलाड़ियों के लिए निर्णायक साबित होंगे। महिला वर्ग में जहां भारत की दावेदारी मजबूत दिख रही है, वहीं पुरुष वर्ग में वापसी के लिए आक्रामक खेल की जरूरत होगी।
