देशभर में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है। मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे AQI.in की लाइव तापमान रैंकिंग के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में सभी शहर भारत के थे। यह स्थिति देश में जारी भीषण हीटवेव की गंभीरता को दर्शाती है।
रैंकिंग के अनुसार सूची में शामिल सबसे कम तापमान वाले शहरों में भी पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। नई दिल्ली, फरीदाबाद, चंडीगढ़, जम्मू, आगरा, अयोध्या, ग्वालियर, कोटा और रायपुर जैसे बड़े शहर भी भीषण गर्मी की चपेट में रहे।
दोपहर तक चंडीगढ़, जम्मू, बठिंडा, पठानकोट, बरेली, झांसी, कैथल और हरिद्वार सहित कई शहरों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई शहरों में तापमान 45 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया।
पूर्वी भारत में भी गर्मी का असर गंभीर बना हुआ है। आसनसोल और दुर्गापुर में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि धनबाद में पारा 44 डिग्री दर्ज किया गया। नई दिल्ली वैश्विक सूची में 99वें और फरीदाबाद 100वें स्थान पर रहे।
भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी राहत की संभावना कम जताई है। विभाग के अनुसार राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश और विदर्भ में भीषण लू की स्थिति बनी रह सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 24 मई तक तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 21 मई तक गंभीर गर्मी की चेतावनी जारी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष गर्मी सामान्य मौसमी चक्र से कहीं अधिक खतरनाक हो गई है। तक्षशिला संस्थान के भूस्थानिक अनुसंधान कार्यक्रम के प्रमुख प्रोफेसर वाई नित्यानंदम के अनुसार तेज सौर विकिरण, शुष्क हवाएं, मिट्टी में नमी की कमी और कम वर्षा के कारण हालात गंभीर हुए हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, हरित क्षेत्रों में कमी और जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और विकट बना दिया है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अब लू की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार, लंबे समय तक और ज्यादा तीव्रता के साथ देखने को मिल रही हैं। रात में भी पर्याप्त ठंडक नहीं मिलने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी का असर देश की बिजली व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। मंगलवार को देश में बिजली की मांग नया रिकॉर्ड बनाते हुए 260 गीगावाट तक पहुंच गई। इससे पहले सोमवार को मांग 258 गीगावाट दर्ज की गई थी, जो अप्रैल में बने 256 गीगावाट के रिकॉर्ड से भी अधिक है।
राष्ट्रीय विद्युत पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को सबसे अधिक 157.2 गीगावाट बिजली तापीय संयंत्रों से उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा सौर ऊर्जा से 61.3 गीगावाट, जल विद्युत से 14.8 गीगावाट और पवन ऊर्जा से 13.5 गीगावाट बिजली प्राप्त हुई।
उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस बार की गर्मी में विशेष चर्चा में है। बुंदेलखंड क्षेत्र का यह जिला पिछले एक महीने में दो बार दुनिया का सबसे गर्म शहर और तीन बार एशिया का सबसे गर्म स्थान बन चुका है। सोमवार को यहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 75 वर्षों में मई महीने का सबसे अधिक तापमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांदा में अत्यधिक गर्मी के पीछे केवल मौसमीय कारण ही नहीं, बल्कि मानवीय गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं। घटती हरियाली, सूखती नदियां, रेत खनन और पत्थरीली जमीन ने क्षेत्र को कृत्रिम ‘हीट आइलैंड’ में बदल दिया है।
