नई दिल्ली। कश्मीर से ईरान के समर्थन में जुटाए गए करोड़ों रुपये के चंदे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब यह धनराशि और कीमती सामान भारत से बाहर नहीं भेजे जा सकेंगे, बल्कि इनका उपयोग देश के भीतर ही तय नियमों के तहत किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, भारत में मौजूद ईरानी दूतावास को मिले कैश, सोना, जेवर और अन्य वस्तुएं सीधे ईरान नहीं भेजी जा सकतीं। इन्हें पहले भारत के अधिकृत बैंकिंग सिस्टम में जमा करना होगा, जिसके बाद ही इनकी वैल्यू तय की जाएगी और उपयोग की अनुमति मिलेगी।
बताया जा रहा है कि इस चंदे से ईरान केवल जरूरी मानवीय उपयोग—खासकर दवाइयों की खरीद—कर सकेगा, और वह भी भारत से ही। यानी पैसा भारत में ही खर्च होगा और हर लेन-देन पर नजर रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।
इस पूरे मामले को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे कि अचानक इतनी बड़ी मात्रा में चंदा कैसे इकट्ठा हुआ और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। अब नए नियमों के चलते यह साफ हो गया है कि बिना निगरानी के इस धन का इस्तेमाल संभव नहीं होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों, खासकर वियना कन्वेंशन के तहत दूतावासों को वित्तीय गतिविधियों के लिए सीमित अधिकार दिए जाते हैं। किसी भी तरह का चंदा जुटाने या उसके उपयोग के लिए मेजबान देश के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
गौरतलब है कि इस चंदा अभियान को लेकर पहले भी विवाद हुआ था, खासकर सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे और सवाल सामने आए थे। अब प्रशासनिक सख्ती के बाद स्थिति स्पष्ट होती नजर आ रही है और पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
