रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के जरिए 14,403 बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया, जिसे सुशासन का एक सशक्त उदाहरण माना जा रहा है।
मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से शुरू की गई इस प्रक्रिया में राज्यभर से प्राप्त 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन पात्र पाए गए। इनमें से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 14,403 बच्चों का चयन किया गया। यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव और विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी बच्चे की शिक्षा आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सभी बच्चों को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
आरटीई प्रावधानों के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित कर रही है। वर्तमान में प्रदेश के 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।
राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके और निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया और मजबूत हो।
पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया गया है, जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन और चयन तक सभी चरण पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं। अभिभावक स्वयं या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान ही सिस्टम 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित स्कूलों की जानकारी और उपलब्ध सीटों का विवरण दिखाता है, जिससे अभिभावकों को सही विकल्प चुनने में सुविधा मिलती है।
पात्रता के अनुसार 5.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाएगा। अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग और अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जाती है। जिन स्कूलों में सीटें खाली रह जाती हैं, वहां जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी आयोजित की जाएगी, जिसकी जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
यह पहल न केवल हजारों बच्चों के शिक्षा के सपनों को साकार कर रही है, बल्कि राज्य में एक पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।
