ओस्लो/चेन्नई, 9 जून 2026। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने प्रतिष्ठित नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल भारतीय शतरंज को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, बल्कि विश्व शतरंज में भारत की बढ़ती ताकत को भी साबित किया है।
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद तमिलनाडु सरकार ने प्रज्ञानानंदा को सम्मानित करते हुए 50 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की। चेन्नई में आयोजित एक विशेष समारोह में मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने उन्हें सम्मानित किया और उनकी उपलब्धि की सराहना की।
मुश्किल शुरुआत, शानदार वापसी
नॉर्वे शतरंज प्रतियोगिता में प्रज्ञानानंदा की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही। शुरुआती छह दौर के बाद वह अंक तालिका में छठे और अंतिम स्थान पर थे। इस दौरान उनकी विश्व रैंकिंग भी प्रभावित हुई, लेकिन युवा भारतीय खिलाड़ी ने हार नहीं मानी।
उन्होंने लगातार चार मुकाबलों में जीत दर्ज कर टूर्नामेंट का पूरा समीकरण बदल दिया। यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों को मात देकर वापसी की।
मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया
टूर्नामेंट के दौरान प्रज्ञानानंदा ने दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी Magnus Carlsen को दो बार पराजित कर शतरंज जगत को चौंका दिया। इसके अलावा उन्होंने मौजूदा विश्व चैंपियन D. Gukesh के खिलाफ भी महत्वपूर्ण जीत हासिल की।
लगातार चार जीत का यह सिलसिला टूर्नामेंट के इतिहास में बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। इससे पहले ऐसा प्रदर्शन वर्ष 2021 में स्वयं मैग्नस कार्लसन ने किया था।
अंतिम दौर में पलटा मुकाबला
फाइनल राउंड से पहले प्रज्ञानानंदा शीर्ष पर चल रहे Wesley So से आधा अंक पीछे थे। खिताब जीतने के लिए उन्हें अंतिम मुकाबला हर हाल में जीतना था।
सफेद मोहरों से खेलते हुए उन्होंने जर्मनी के ग्रैंडमास्टर Vincent Keymer को हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस जीत से उन्हें तीन अंक मिले और उनके कुल अंक 18 हो गए, जिससे वे अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए और चैंपियन बने।
भारत के लिए गौरव का क्षण
प्रज्ञानानंदा की इस उपलब्धि को भारतीय शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने विश्व शतरंज में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। डी. गुकेश, प्रज्ञानानंदा और अन्य युवा खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने देश को वैश्विक शतरंज महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रज्ञानानंदा की यह जीत भारतीय शतरंज के स्वर्णिम भविष्य का संकेत है और आने वाले वर्षों में भारत विश्व शतरंज पर और अधिक प्रभाव डाल सकता है।
