नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार का एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से संशोधनों के साथ ध्वनिमत से पारित हो गया। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष के जोरदार विरोध और हंगामे के बीच सदन ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दी। अब इस कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
दो दिनों तक चली चर्चा के बाद मिला समर्थन
इस विधेयक पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत मंगलवार को हुई थी। बुधवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से बहस का जवाब दिया और परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद सदन ने संशोधनों सहित विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
हंगामे के कारण कई बार स्थगित हुई कार्यवाही
बुधवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर 3 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा आगे बढ़ी और अंततः इसे पारित कर दिया गया।
सदन में तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली
चर्चा के दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद दिलेश्वर कामत ने बहस की शुरुआत की। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नियम पुस्तिका का हवाला देते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी पर आपत्ति जताई। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल कुछ समय के लिए गर्मा गया।
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों पर सख्त रोक लगाना है। नए कानून के लागू होने से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाने और छात्रों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब इस विधेयक को कानून बनने के लिए संसद की आगे की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
