नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लक्ष्य के ऐलान के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। बीजेपी UCC को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है, वहीं गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों ने संवेदनशील विषय पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की सहमति की जरूरत बताई है।
अमित शाह ने मुंबई में अपने संबोधन के दौरान UCC को सरकार के प्रमुख एजेंडे में शामिल बताते हुए कहा था कि देश में नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। समान नागरिक संहिता के तहत शादी, तलाक, विरासत और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में समान नियम लागू करने की परिकल्पना की जाती है।
JDU ने व्यापक चर्चा की जरूरत बताई
शाह के बयान के बाद बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने UCC को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए संकेत दिया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा जरूरी है। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि पार्टी के नेता गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा करेंगे। पार्टी ने UCC को लेकर सभी पक्षों की राय को महत्वपूर्ण बताया है।
चिराग पासवान ने ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग की
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी UCC को लेकर जल्दबाजी से बचने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पहले UCC का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाना चाहिए और इसके बाद विभिन्न समुदायों तथा संबंधित हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए। चिराग पासवान ने देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
TDP ने अभी नहीं बताया अंतिम रुख
NDA की एक अन्य प्रमुख सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने फिलहाल UCC पर अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि उचित समय आने पर इस मुद्दे पर अपनी राय रखी जाएगी।
ऐसे में अमित शाह के 2029 तक UCC लागू करने के लक्ष्य के सामने कानून तैयार करने के साथ-साथ NDA के भीतर सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाना भी बड़ी चुनौती होगी। बीजेपी के लिए UCC को आगे बढ़ाने के दौरान गठबंधन सहयोगियों की चिंताओं को दूर करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई राज्यों में UCC को लेकर आगे बढ़े कदम
उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, असम और गुजरात में UCC को लेकर राज्य स्तर पर कदम उठाए जा चुके हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अन्य बीजेपी और NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है और इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर किस तरह की सहमति बनती है।
