संस्कृति विभाग द्वारा मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस, घड़ी चौक रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय ‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला के दूसरे दिन रंगमंच की विविध शैलियों का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। एक ओर छत्तीसगढ़ी हास्य नाटिका ने दर्शकों को खूब हंसाया, वहीं दूसरी ओर ‘मीरा’ की एकल प्रस्तुति ने भक्ति और भावनाओं से माहौल को भावविभोर कर दिया।
दूसरे दिन रंग तरंग भिलाई की ओर से भारत भूषण परगनिहा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ी हास्य नाटिका ‘कोन चीज के डायरेक्टर होही’ का मंचन किया गया। छत्तीसगढ़ी लोकभाषा की सहजता, चुटीले संवाद और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रस्तुति के दौरान मुक्ताकाशी मंच पर कई बार हंसी के ठहाके गूंजे और कलाकारों की संवाद अदायगी को दर्शकों ने खूब सराहा।
मीरा की भक्ति और समर्पण ने किया भावविभोर
कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति श्री आर्ट संस्था, लाखेनगर की ओर से श्रीमती ममता आहार श्रिया की ‘मीरा’ विषय पर एकल अभिनय रही। सीमित मंचीय संसाधनों के बावजूद कलाकार ने अभिनय, संवाद, भाव-भंगिमाओं और भक्ति गीतों के माध्यम से मीरा के व्यक्तित्व तथा भगवान कृष्ण के प्रति उनके अटूट समर्पण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रस्तुति में मीरा के जीवन के संघर्ष, सामाजिक परिस्थितियों और उनकी अडिग भक्ति को संवेदनशीलता के साथ दर्शाया गया। मीरा के विषपान का प्रसंग विशेष रूप से मार्मिक रहा। कलाकार की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और पूरा मंच भक्ति एवं आध्यात्मिक अनुभूति से भर उठा।
नाटक समाज का जीवंत दर्पण : डॉ. संजय कनौजे
इस अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का जीवंत दर्पण है। रंगमंच के जरिए समाज की संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी तरीके से सामने रखा जाता है। कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि नाटक संस्कृति, परंपरा और मानवीय मूल्यों को समृद्ध करने के साथ समाज में संवाद और संवेदनशीलता का वातावरण तैयार करने का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम में साहित्य और कला जगत की हस्तियों की मौजूदगी रही। छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा, श्री उदयभान चौहान, साहित्यकार श्री अरविंद मिश्ररूप सहित संस्कृति विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
‘रंग परब’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकभाषा, साहित्य, संस्कृति और रंगमंचीय परंपराओं को व्यापक मंच मिल रहा है। अलग-अलग रंग शैलियों और विषयों पर आधारित प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय कलाकारों और रंग संस्थाओं को मंच मिलने के साथ दर्शकों को भी विविध रंग प्रस्तुतियों से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है।
