पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ संकल्प अभियान के तहत एक माह से चल रहे विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का गुरुवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
राज्यपाल श्री डेका ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि भारत युवाओं का देश है और युवा शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं के विचार, संकल्प और सपने देश की दिशा तय करते हैं। इसलिए युवा पीढ़ी को नशे जैसी बुराइयों से बचाना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को युवाओं को नशामुक्त बनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से इस महाअभियान की शुरुआत की है। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने पारंपरिक नशे के साथ बढ़ते सूखे नशे के चलन को भी युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बताया।
नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि नशा व्यक्ति की सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता को प्रभावित करता है। नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति को केवल दोषी मानने के बजाय उसके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए काउंसलिंग और आवश्यकता पड़ने पर उपचार की व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक नशे से मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं और 21वीं सदी में मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
करियर की चिंता का समाधान नशा नहीं
श्री डेका ने युवाओं से कहा कि परीक्षा का दबाव, करियर की चिंता, असफलता का भय और अपेक्षाओं का बोझ जीवन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इन परिस्थितियों से बचने के लिए नशे का सहारा लेना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्या से भागना नहीं, बल्कि उसका सामना करना ही वास्तविक साहस है।
राज्यपाल ने युवाओं से अनुशासन, समय की पाबंदी और नियमित अध्ययन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत से ज्ञान बढ़ने के साथ विभिन्न विषयों के प्रति जागरूकता भी विकसित होती है। उन्होंने डिजिटल एडिक्शन को भी गंभीर चुनौती बताते हुए डिजिटल माध्यमों का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की।
विद्यार्थियों को दिलाई नशामुक्त भारत की शपथ
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हार्टफुलनेस आश्रम, हैदराबाद के संचालक श्री त्रिलोचन चावला ने नशा मुक्ति के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ भी दिलाई।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि अभियान को सफल बनाने में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और माय भारत वॉलिंटियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों का सम्मान
अभियान के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सम्मानित किया। राष्ट्रीय शिक्षा पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ प्रोफेसर श्री राजीव चौधरी को भी राज्यपाल ने सम्मानित किया।
रेडक्रॉस एवं रोटरी संस्था द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर के लिए संस्था के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य, प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
