रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यटन को रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने के लिए राज्य सरकार मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई जाएगी। इसके लिए पर्यटन विकास मिशन के तहत 500 करोड़ रुपये की मूल निधि प्रस्तावित की गई है। वहीं, विभिन्न वित्तीय स्रोतों के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 13 अक्टूबर को महानदी भवन मंत्रालय में पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मिशन की कार्ययोजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पर्यटन का विकास केवल पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों, कलाकारों और छोटे व्यवसायियों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी मिलने चाहिए।
चित्रकोट, मैनपाट और सिरपुर समेत प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा विकास
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के प्रथम चरण में चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को प्रमुख पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके अलावा मायाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर भी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
इन स्थलों पर बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। विकास कार्यों के दौरान स्थानीय संस्कृति, वास्तुकला और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य
पर्यटन विकास के जरिए स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए मिशन के अंतर्गत 1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन आधारित गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।
इसके अलावा 600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मियों और 500 टूर गाइड तथा फ्रंटलाइन कर्मियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला, पर्यटन मार्गदर्शन और परिवहन सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और व्यवसाय शुरू करने के अवसर मिल सकेंगे।
पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने की तैयारी
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही पर्यटकों के औसत प्रवास की अवधि बढ़ाकर दो दिन करने की दिशा में काम किया जाएगा।
पर्यटकों के लिए बेहतर आवास व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश में 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता तैयार करने की कार्ययोजना बनाई गई है। इसके लिए होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे और अन्य आवासीय सुविधाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
पर्यटन क्षेत्र में 10 से 20 सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इनके माध्यम से कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पर्यटन से जुड़ी सेवाओं, स्थानीय बाजारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट होंगे विकसित
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग पर्यटन स्थलों को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए चार प्रमुख पर्यटन सर्किट और 15 मिनी पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है। इससे पर्यटक एक ही यात्रा के दौरान प्रदेश के प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक और जनजातीय पर्यटन स्थलों का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
प्रमुख पर्यटन मार्गों पर लगभग 15 से 20 वे-साइड सुविधाएं और करीब 500 पर्यटन संकेतक स्थापित करने की योजना भी है। इससे पर्यटकों को रास्तों की जानकारी, यात्रा की योजना बनाने और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।
डिजिटल तकनीक से आसान होगी पर्यटन यात्रा
पर्यटन सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए बहुभाषी पर्यटन वेबसाइट, मोबाइल एप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पर्यटन सूचना, डिजिटल बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान और रियल टाइम नेविगेशन जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटकों को पर्यटन स्थलों, होटल, परिवहन, स्थानीय आकर्षण, खानपान और अन्य जरूरी सेवाओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे प्रदेश में आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों की यात्रा अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।
जनजातीय संस्कृति और विरासत बनेगी पर्यटन की पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर और सरगुजा अंचल की प्राकृतिक सुंदरता तथा जनजातीय संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला, लोकनृत्य, पारंपरिक खानपान, हस्तशिल्प और जीवनशैली राज्य की अमूल्य विरासत हैं।
पर्यटन विकास के दौरान इन परंपराओं की मौलिकता और गरिमा को बनाए रखते हुए उन्हें व्यापक पहचान दिलाई जाएगी। साथ ही प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता का ध्यान रखते हुए विकास कार्य किए जाएंगे।
‘पर्यटन से समृद्धि’ होगा मिशन का मूल उद्देश्य
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन की मूल अवधारणा ‘पर्यटन से समृद्धि’ रखी गई है। इसका उद्देश्य पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर रोजगार, निवेश, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्रीय विकास से जोड़ना है।
मिशन की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय मार्गदर्शक समिति और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय संचालन समिति का प्रावधान किया गया है। पर्यटन, लोक निर्माण, वन, नगरीय प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्योग और कौशल विकास सहित संबंधित विभागों के समन्वय से परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
समीक्षा बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन परियोजनाओं के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए और उनके क्रियान्वयन में स्थानीय रोजगार तथा आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दी जाए।
राज्य सरकार की इस कार्ययोजना से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने, निजी निवेश आकर्षित करने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
