विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीन अफ्रीकी देशों के दौरे के पहले चरण में घाना की राजधानी अकरा का दौरा किया। यहां उन्होंने घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुदजेटो अबलाकवा और राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।
घाना के विदेश मंत्री से हुई व्यापक बातचीत
जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुदजेटो अबलाकवा के साथ व्यापक बातचीत की। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के साझेदार के तौर पर भारत और घाना की विकास से जुड़ी आकांक्षाएं और ऐतिहासिक एकजुटता समान है।
बैठक में व्यापार, निवेश, विकास, दवा, क्षमता निर्माण, रक्षा, टेक्नोलॉजी और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
अफ्रीकी संघ और ECOWAS के साथ सहयोग पर जोर
दोनों विदेश मंत्रियों ने बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ अफ्रीकी संघ और ECOWAS के साथ भारत के जुड़ाव को और मजबूत करने पर भी बातचीत की।
घाना ECOWAS का संस्थापक सदस्य है। यह पश्चिम अफ्रीका के 15 देशों का क्षेत्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक एकीकरण को बढ़ावा देना है।
घाना ने भारत को बताया अहम रणनीतिक साझेदार
घाना के विदेश मंत्री अबलाकवा ने कहा कि घाना और भारत अब अहम रणनीतिक साझेदार हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घाना यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था।
कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में हुए समझौते
जयशंकर की यात्रा के दौरान भारत और घाना के बीच अकादमिक, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और घाना विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया।
इसके अलावा कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली और CSIR-Crops Research Institute, Ghana के बीच भी समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ।
राष्ट्रपति महामा से भी मिले जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और घाना के बीच संबंधों में आई मजबूती और आगे सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। यह यात्रा भारत की अफ्रीका के साथ साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
