भारतीय राजनीति की वरिष्ठ और सम्मानित चेहरों में शुमार सुमित्रा महाजन आज अपना 82वां जन्मदिन मना रही हैं। उन्हें लोग प्यार से “ताई” कहकर पुकारते हैं। आठ बार की लोकसभा सांसद और 2014 से 2019 तक लोकसभा अध्यक्ष रह चुकीं सुमित्रा महाजन का राजनीतिक सफर जितना गौरवपूर्ण रहा है, उतना ही प्रेरक है उनका सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन भी।
सुमित्रा महाजन का जन्म 12 अप्रैल 1943 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिपलूण कस्बे में हुआ था। उन्होंने एम.ए. और एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत इंदौर नगर निगम से की। धीरे-धीरे उन्होंने महापौर, फिर सांसद और अंततः लोकसभा अध्यक्ष जैसे पदों तक का सफर तय किया।
लेकिन राजनीति में कदम रखने से पहले सुमित्रा महाजन एक रामकथा वाचिका के रूप में जानी जाती थीं। इंदौर में उन्होंने मैना ताई गोखले के साथ मिलकर रामायण पर प्रवचन देना शुरू किया था। बाद में जब मैना ताई अस्वस्थ हो गईं, तो उन्होंने स्वयं प्रवचन देना शुरू किया। यही वह मोड़ था जब ताई का सार्वजनिक जीवन शुरू हुआ और उनकी वाणी और विचारों ने लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
उनकी वक्तृत्व कला, जनसंपर्क कौशल और सरलता ने उन्हें इंदौर की जनता का प्रिय बना दिया। उन्होंने 1989 से लेकर 2014 तक लगातार आठ बार लोकसभा चुनाव जीते और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। वे मीरा कुमार के बाद लोकसभा अध्यक्ष बनने वाली दूसरी महिला थीं।
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर पूरा देश उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है। सुमित्रा महाजन न केवल एक राजनेता हैं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, सेवा और समर्पण की जीती-जागती मिसाल भी हैं।
