घुटनों और जोड़ों के दर्द की समस्या अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठकर काम करना, बढ़ता वजन और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण युवाओं में भी यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते सावधानी न बरती जाए तो मामूली दर्द भी आगे चलकर गंभीर रूप ले सकता है।
क्यों अहम है घुटना?
घुटना शरीर का सबसे महत्वपूर्ण जोड़ है, जो चलने, बैठने, उठने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजमर्रा के कामों में मुख्य भूमिका निभाता है। घुटनों में दर्द होने पर व्यक्ति की सक्रियता कम हो जाती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं और वजन बढ़ने का खतरा रहता है। इससे डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस बड़ी वजह
जोड़ों के दर्द का एक प्रमुख कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस है, जिसमें समय के साथ कार्टिलेज घिसने लगती है। इसके अलावा चोट, जोड़ों पर अधिक दबाव और गलत जीवनशैली भी समस्या को बढ़ा सकती है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से सर्जरी तक की नौबत आ सकती है।
कैसे रखें घुटनों का ध्यान?
1. नियमित व्यायाम करें
क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम घुटनों को सहारा देते हैं। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हल्की एक्सरसाइज से दर्द कम करने और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। गठिया जैसी समस्याओं से बचाव में भी व्यायाम अहम भूमिका निभाता है।
2. संतुलित आहार अपनाएं
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अलसी, अखरोट और मछली सूजन कम करने में सहायक होते हैं। विटामिन डी और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। वहीं प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक और शुगर से दूरी बनाना फायदेमंद है।
3. वजन रखें नियंत्रित
अधिक वजन घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे दर्द और गठिया का खतरा बढ़ता है। नियमित व्यायाम और संतुलित डाइट से वजन नियंत्रण में रखा जा सकता है।
4. सही जूतों का चयन
खराब क्वालिटी के जूते या ऊंची एड़ी की सैंडिल घुटनों और एड़ी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। आरामदायक और सपोर्ट देने वाले जूते पहनना जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें गठिया या जोड़ों की समस्या है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी उम्र से ही सक्रिय जीवनशैली अपनाने और संतुलित खानपान पर ध्यान देने से भविष्य में जोड़ों की गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह के रूप में न लें। किसी भी प्रकार की समस्या या लक्षण होने पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।
