पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों को लेकर जारी विवाद के बीच रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के लिए पुस्तक लेखन संबंधी नए दिशानिर्देश लाने के किसी प्रस्ताव की उन्हें जानकारी नहीं है।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से ही नियम और कानून मौजूद हैं, जिनमें Official Secrets Act (ओएसए) भी शामिल है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा दिशानिर्देशों की कमी नहीं, बल्कि यह है कि क्या किसी मौजूदा नियम का उल्लंघन किया गया है।
“मौजूदा कानून पर्याप्त”
रक्षा सचिव ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे इस विशेष मुद्दे की जानकारी नहीं है कि नए दिशानिर्देशों पर विचार हो रहा है। मौजूदा दिशानिर्देश और ओएसए लागू होते हैं। सवाल यह है कि क्या किसी ने उनका उल्लंघन किया है।” उन्होंने यह भी बताया कि सार्वजनिक स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं।
संस्मरण का जिक्र और राजनीतिक विवाद
विवाद उस समय गहराया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान चीन के साथ 2020 के गतिरोध का मुद्दा उठाते हुए जनरल नरवणे की प्रस्तावित आत्मकथा Four Stars of Destiny का हवाला देने की कोशिश की। इसके बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई।
कथित लीक पर जांच
9 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार मंचों पर प्रसारित सूचनाओं का संज्ञान लिया, जिनमें दावा किया गया था कि पुस्तक की प्री-प्रिंट प्रति प्रसारित की जा रही है। स्पेशल सेल ने “अब तक स्वीकृत न हुई पुस्तक के कथित लीक/उल्लंघन” के संबंध में मामला दर्ज किया है।
सूत्रों के अनुसार, स्पेशल सेल ने प्रकाशन संस्था Penguin India के अधिकारियों से लगातार दो दिनों तक पूछताछ की। जांच के दौरान पांडुलिपि और उसकी डिजिटल फाइलों के प्रबंधन तथा वितरण प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी जुटाई गई। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर प्रकाशन गृह के प्रतिनिधियों को दोबारा तलब किया जा सकता है।
फिलहाल जांच एजेंसियां कथित लीक के स्रोत और संभावित उल्लंघन की दिशा में पड़ताल कर रही हैं, जबकि रक्षा मंत्रालय ने नए नियमों की अटकलों को खारिज कर दिया है।
