देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का नाम जिस देवी के आशीर्वाद से जुड़ा है, वे हैं मां मुंबा देवी। उन्हें मुंबई की ग्रामदेवी और कुलदेवी माना जाता है। मान्यता है कि “मुंबई” शब्द ‘मुंबा’ और ‘आई’ (मां) से मिलकर बना है, यानी मां मुंबा की नगरी।
400 साल पुराना आस्था का केंद्र
भुलेश्वर इलाके में स्थित मुंबा देवी मंदिर करीब 400 वर्ष पुराना बताया जाता है। इसे मूल रूप से कोली मछुआरा समुदाय ने स्थापित किया था। समुद्र में जाने से पहले मछुआरे देवी से रक्षा और समृद्धि की प्रार्थना करते थे। आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ यहां पहुंचते हैं।
भक्तों की अटूट आस्था
मान्यता है कि मां मुंबा अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं और संकटों से रक्षा करती हैं। सुबह से ही मंदिर में दर्शनार्थियों की कतार लग जाती है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और मंदिर परिसर भक्ति भाव से सराबोर हो जाता है।
मंदिर की विशेषताएं
मंदिर में मां मुंबा देवी के साथ मां जगदंबा और मां अन्नपूर्णा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां दिन में छह बार आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। एक विशेष परंपरा के तहत मां मुंबा का वाहन प्रतिदिन बदलता है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।
मुंबा देवी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मुंबई के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। महानगर की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच यह मंदिर आज भी शांति, विश्वास और परंपरा का केंद्र बना हुआ है।
