अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर जेफ्री एपस्टीन प्रकरण ने हलचल मचा दी है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक। कांग्रेस में पेशी के दौरान लुटनिक ने स्वीकार किया कि वह 2012 में एपस्टीन के निजी कैरिबियन द्वीप ‘लिटिल सेंट जेम्स’ गए थे—हालांकि वर्षों से वह एपस्टीन से 2005 के बाद संबंध खत्म करने का दावा करते रहे हैं।
सांसदों के सवालों पर लुटनिक ने कहा, “मैं परिवार के साथ नाव से छुट्टी पर था। हम करीब एक घंटे के लिए रुके और लंच किया।” लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आखिर वे वहां गए ही क्यों, तो उनका जवाब था—“मुझे याद नहीं कि हम क्यों गए थे, बस गए थे।” इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है।
पुराने दावों से टकराव
लुटनिक पहले सार्वजनिक रूप से कह चुके थे कि 2005 के बाद उन्होंने एपस्टीन से सारे संबंध तोड़ लिए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि एक “अजीब घटना” के बाद उन्होंने कभी एपस्टीन के साथ एक कमरे में न बैठने की कसम खाई थी। ऐसे में 2012 की यह यात्रा उनके पूर्व दावों के विपरीत मानी जा रही है।
दस्तावेजों ने बढ़ाई मुश्किलें
हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा जारी दस्तावेजों में 23 दिसंबर 2012 के ईमेल रिकॉर्ड सामने आए हैं। इनमें कथित तौर पर लुटनिक की पत्नी द्वारा एपस्टीन के सहायक से संपर्क कर नाव ठहराने और लंच की व्यवस्था का अनुरोध किया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार 14 वर्षों में दोनों पक्षों के बीच करीब 10 ईमेल और 3 मुलाकातों का उल्लेख है।
संसद में हंगामा
डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना और रिपब्लिकन थॉमस मैसी—दोनों ने लुटनिक के इस्तीफे की मांग की है। उनका आरोप है कि उन्होंने जनता और कांग्रेस को गुमराह किया। हालांकि व्हाइट हाउस ने लुटनिक का बचाव करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप को उन पर “पूरा भरोसा” है और वे प्रशासन के अहम सदस्य हैं।
फाइलों से बढ़ी सियासी गर्मी
एपस्टीन से जुड़ी लाखों पन्नों की फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद कई प्रभावशाली नामों पर सवाल उठे हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन कुछ दस्तावेजों को आंशिक रूप से सार्वजनिक कर रहा है या संवेदनशील हिस्सों को हटाकर पेश कर रहा है।
लुटनिक ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में बहस इस बात पर है कि क्या विरोधाभासी बयान उनकी कुर्सी पर भारी पड़ेंगे। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच और संसदीय दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन आगे क्या रुख अपनाता है।
