पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को “राजनीतिक हथियार” नहीं बनाया जाना चाहिए।
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू ने कहा, “मैं राहुल गांधी को सबक नहीं सिखा सकता। समझ नहीं आता कि वे किस दुनिया में रहते हैं और कौन सी विचारधारा उनके कार्यों को प्रेरित करती है। संसद बच्चों जैसा व्यवहार करने की जगह नहीं है।” उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी अपील की कि वे अपने नेता को समझाएं कि संसद की गरिमा और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है।
रिजिजू ने कहा कि भारत जैसा विशाल देश सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति बर्दाश्त नहीं कर सकता। “किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना और सुरक्षा मामलों को राजनीतिक हथियार बनाना उचित नहीं है,” उन्होंने जोड़ा।
दरअसल, राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जनरल नरवणे की आत्मकथा का हवाला देते हुए 2020 में चीन के साथ हुए गतिरोध का जिक्र किया था। इसी के बाद सत्ता पक्ष ने उनके बयान पर आपत्ति जताई और विवाद खड़ा हो गया।
वहीं कांग्रेस ने अपने नेता का बचाव किया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि लोकसभा में गांधी द्वारा कही गई बातें “स्पष्ट और सटीक” थीं। उन्होंने कहा, “समझ नहीं आता कि सरकार इस मुद्दे पर इतनी घबराई हुई क्यों है। हमने संसद के अंदर और बाहर जो कहा है, उस पर पूरी तरह कायम हैं।”
इस बीच, प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस ने राहुल गांधी के उस दावे का खंडन किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि पुस्तक ऑनलाइन उपलब्ध है। प्रकाशक के अनुसार, किसी भी पुस्तक को तभी प्रकाशित माना जाता है जब वह सभी खुदरा चैनलों पर बिक्री के लिए उपलब्ध हो। फिलहाल पुस्तक प्री-ऑर्डर चरण में है और अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है।
लोकसभा में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन मुद्दा दोनों ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय हैं।
