स्विस एजेंसी IQAir की ताजा ‘वर्ल्ड एयर क्वॉलिटी रिपोर्ट’ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 13 भारत के हैं। राजस्थान का भिवाड़ी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जबकि नई दिल्ली सबसे प्रदूषित महानगर के रूप में सामने आया है। लगातार बिगड़ती हवा से दिल्लीवालों की सेहत पर भारी असर पड़ रहा है।
दिल्ली की हवा में जहर, AQI ‘Unhealthy’ कैटेगरी में
नई दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 191 तक पहुंच गई है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 के कणों की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा पाई गई है।
🔴 PM2.5 का स्तर – 112 माइक्रोग्राम/घन मीटर
🔴 PM10 का स्तर – 249 माइक्रोग्राम/घन मीटर
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली की जहरीली हवा बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा या सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
प्रदूषण से दिल्लीवालों को हो रही ये गंभीर बीमारियां
दिल्ली के कई अस्पतालों में सांस की समस्या, आंखों में जलन और त्वचा रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों की बीमारियों, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और हार्ट अटैक जैसी घातक बीमारियों की वजह बन सकता है।
दिल्ली सरकार के बड़े फैसले, क्या मिलेगा राहत?
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए हैं –
✅ कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों को बंद करना
✅ सड़क पर धूल और कचरा जलाने पर सख्ती
✅ ऑड-ईवन योजना लाने की तैयारी
✅ इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रयासों से तब तक कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा, जब तक पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए जाते।
दिल्लीवालों के लिए अलर्ट, ऐसे करें खुद को सुरक्षित
अगर आप दिल्ली या किसी अन्य प्रदूषित शहर में रहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें –
✔ बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनें
✔ सुबह और रात के समय वॉक या एक्सरसाइज करने से बचें
✔ ज्यादा पानी पिएं और घर में एयर प्यूरीफायर लगाएं
✔ पेड़-पौधे लगाएं और प्रदूषण फैलाने वाली चीजों से बचें
क्या सरकार और जनता मिलकर बदल सकते हैं हालात?
दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए सिर्फ सरकार के प्रयास काफी नहीं हैं। जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। निजी वाहनों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल, कचरा जलाने से बचना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना जैसे छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली और अन्य भारतीय शहरों में रहना खतरनाक हो सकता है।
