सहायता राशि से सिलाई मशीन खरीद, भगवती रात्रे बनी आत्मनिर्भर
प्रतिमाह 5 हजार रुपये की आय से परिवार को मिला नया संबल
महतारी वंदन योजना राज्य की महिलाओं के जीवन में आशा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया उजाला लेकर आई है। इस योजना की सफलता का प्रेरणादायी उदाहरण सारंगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के ग्राम पंचायत संडा की निवासी भगवती रात्रे हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में साहस, सूझबूझ और मेहनत से अपने परिवार को संभालने का संकल्प लिया।
परिवार में वे स्वयं, उनके पति और तीन वर्ष की बेटी हैं। विवाह के बाद पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें ससुराल से अलग रहना पड़ा। घर की पूरी जिम्मेदारी उनके पति पर थी, जो मजदूरी कर किसी तरह खर्च चलाते थे। दुर्भाग्यवश एक गंभीर दुर्घटना में उनके पति काम करने में असमर्थ हो गए। इसके बाद इलाज, दैनिक खर्च और बच्ची की जरूरतों ने परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया।
ऐसे समय में महतारी वंदन योजना संबल बनी। योजना के तहत मिलने वाली प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता राशि को केवल खर्च न कर उन्होंने नियमित बचत शुरू की। इसी बचत से 6 हजार रुपये की सिलाई मशीन खरीदी और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।
आज भगवती रात्रे सिलाई कार्य से प्रतिमाह लगभग 5 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से वे परिवार का भरण-पोषण, पति के इलाज में सहयोग, बेटी की पढ़ाई और घर की आवश्यकताओं को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं।
महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आत्मविश्वास, स्वावलंबन और सामाजिक सम्मान भी दिया है। वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
उन्होंने इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त किया।
